शक्ति के स्वरूप - Forms of Power
शक्ति के स्वरूप - Forms of Power
सामान्यतः समाज में शक्ति दो रूपों में देखी जाती है
1. सत्ता (Authority )
2. प्रभाव (Influence)
1. सत्ता
सत्ता वैध शक्ति होती है और यह एक पद को धारण करने से प्राप्त होती है। जिससे व्यक्ति अथवा समूह दूसरे लोगों अथवा दूसरे समूह को आदेश देने का अधिकार प्राप्त हो जाता है और इसके द्वारा वह व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित करता है इस तरह सत्ता में औपचारिक शक्ति होती है
2. प्रभाव
प्रभाव को व्यक्तियों एवं समूह के द्वारा समाज में लोगों के व्यवहार और क्रिया को प्रभावित करने वाली शक्ति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है इसमें शक्ति संरचना और नेतृत्व दोनों सम्मिलित होते हैं।
आईटी एवं हंट के अनुसार प्रभाव का अर्थ दूसरों के व्यवहार और निर्णय को बिना सत्ता के प्रभावित करने की क्षमता है। इस तरह यह प्रभाव को सीमित अर्थों में दर्शाते हैं। सत्ता और प्रभाव दोनों को हम एक उदाहरण के द्वारा समझ सकते हैं यदि किसी जिले में जिला अधिकारी को पद धारण करने के कारण जो शक्ति प्राप्त है वह सत्ता कहलाती है लेकिन यदि किसी ग्राम में किसी बुजुर्ग व्यक्ति को उसके व्यवहार कुशलता, उसकी दयालुता उसकी मिलनसारिता के कारण उसे जो शक्ति प्राप्त है वह उसका प्रभाव कहलायेगा।
अतः कहा जा सकता है कि व्यक्ति को जो शक्ति पद के कारण प्राप्त होती है वह वैधानिक शक्ति होती है और जो प्रभाव के कारण होती प्राप्त होती है वह अवैधानिक शक्ति कहलाती है। समाज में शक्ति अनेक रूपों में प्रगट होती है उसके चार प्रमुख स्वरूप इस प्रकार है:
1. अभिजात शक्ति (The Elite Power) हर समाज में कुछ लोगों का ऐसा समूह पाया जाता है जो अपनी संपत्ति, कार्य करने की क्षमता तथा प्रभाव से अथवा उच्च पदों या शक्ति धारण करते हैं
उन्हें हम अभिजात शक्ति कहते हैं।
2. संगठित शक्ति (Organized Power) कुछ ऐसे भी संगठन होते हैं जिन्हें जनता का समर्थन और स्वीकृति प्राप्त होती है और वह संगठन के कारण अपनी शक्ति का प्रयोग करते हैं
उदाहरण के तौर पर विद्यार्थी, वकील, डॉक्टर, उद्योगपति, अध्यापक आदि कुछ ऐसे वर्ग हैं जिनका समाज में महत्वपूर्ण स्थान होता है और यह लोग अपने शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए अक्सर संचार के साधनों जैसे पत्र पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन आदि का प्रयोग करते हैं।
3. असंगठित लोगों की शक्ति (Power of Unorganized Masses) असंगठित लोगों में भी शक्ति निहित होती है हालांकि शक्ति का प्रयोग कभी कभी ही हो पाता है
जैसे कीबोर्ड के द्वारा किसी कार्य में सहयोग और असहयोग के द्वारा इस शक्ति का प्रदर्शन होता है।
4. कानून की शक्ति (Power of Law) यह शक्ति का वैधानिक रूप कहलाता है और इसे समाज के लोगों की स्वीकृति प्राप्त होती है यह संगठित और अनौपचारिक संरचना का प्रतिनिधि होती है एस शक्ति के द्वारा व्यक्ति के व्यवहार पर नियंत्रण रखा जाता है। इस शक्ति में लोगों के अधिकार और कर्तव्यों की निश्चित परिभाषा होती है नियमों का उल्लंघन करने पर दंड की व्यवस्था भी होती है प्रत्येक समाज में कुछ प्रभावशाली और शक्तिशाली व्यक्ति होते हैं जो सामूहिक निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं शक्ति धारण करने वाले ऐसे लोग एवं समूह आपस में संबंधित होते हैं और समाज में शक्ति संरचना का निर्माण करते है ये शक्ति का प्रयोग प्रायः अनौपचारिक रूप से करते हैं।
वार्तालाप में शामिल हों