भारत में समाजशास्त्र के संस्थापक - Founder of Sociology in India
भारत में समाजशास्त्र के संस्थापक - Founder of Sociology in India
भारत के वे प्राम्भिक समाजशास्त्री जिन्होंने भारत में समाजशास्त्र को एक विषय के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ उसकें विकास में महत्वपूर्ण सहयोग दिया को संस्थापक समाजशात्रियों के रूप में देखा के जाता है जिसमें प्रमुख रूप से जी. एस. घुरिये, राधा कमल मुखर्जी, डी.पी. मुखर्जी और एम. एन. निवास आदि है। इनमें सर्वप्रथम जी.एस. घुरिये का नाम आता है। जिन्हें भारत के समाजशास्त्र के जन्मदाता के रूप में देखा जाता है। पैट्रिक गीड्स के बाद सन् 1924 में बम्बई विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग का कार्यभार संभालनें वाले घुरिये प्रथम भारतीय समाजशास्त्री थे।
राधाकमल मुखर्जी जो मूलतः अर्थशास्त्री थे सन् 1921 में लखनऊ विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष के रूप में जुड़े, इन्होंने अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और इतिहास को एक साथ प्रस्तुत किया। सन् 1922 में डी. पी. मुखर्जी भी लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े जो मार्क्सवादी विचारधारा के समर्थक थे, इन्होनें भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता के बीच द्वन्दात्मक संबंधों की चर्चा करते हुए ऐसी आधुनिकता पर बल दिया है जो भारतीयता पर आधारित है। जी. एस. घुरिये, आर.के. मुखर्जी, डी.पी. मुखर्जी जैसे प्रथम पीढ़ी के समाजशास्त्रियों के बाद एम. एन. निवास को शीर्षस्थ स्थान है। ये सन् 1959 में दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष के रूप जुड़े। इन समाजशास्त्रियों के शोधकार्य, अध्यापन, लेखन, मार्गदर्शन का भारत के समाजशास्त्र के विकास में व्यापक योगदान है। भारत में समाजशास्त्र के संस्थापक की इस इकाई के अन्तर्गत हम इन समाजशास्त्रियों के जीवन परिचय, मुख्य विचारों और प्रमुख रचनाओं के बारे में विस्तृत चर्चा करेंगे।
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