हरबर्ट स्पेंसर का प्रारंभिक जीवन - Herbert Spencer's Early Life

हरबर्ट स्पेंसर का प्रारंभिक जीवन - Herbert Spencer's Early Life


समाजशास्त्र के अंग्रेज पिता हरबर्ट स्पेंसर का जन्म इंग्लैंड के डर्बी नामक स्थान पर 27 अप्रैल 1820 को एक साधारण परिवार में हुआ था। आपके पिता जॉर्ज स्पेंसर प्रोटेस्टेंट और परंपरा विरोधी अध्यापक थे। आपके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। स्पेंसर अपने पिता की सबसे बड़े संतान थे। उनके 8 बच्चे थे परंतु कोई बड़ा होने तक बचा नहीं था। स्पेन्सर बचपन से ही कमजोर थे। परिवार की आर्थिक स्थिति उनके कमजोर स्वास्थ्य के कारण पिता ने अपने इकलौते पुत्र होने के बाद भी उन्हें औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए नहीं भेजा और उनके पिता एवं चाचा ने घर पर ही उन्हें शिक्षा प्रदान की। स्पेंसर के चाचा का नाम टॉमस स्पेंसर्स था वह पादरी और अध्यापक थे इसलिए 13 वर्ष की उम्र में स्पेंसर अपने चाचा के पास पढ़ने के लिए चले गए थे।

स्पेंसर न तो कभी स्कूल गए और न ही कॉलेज हालांकि उनके पिता ने कैंब्रिज में पढ़ाई की थी लेकिन स्पेंसर की शारीरिक कमजोरी और इकलौतेपन ने उन्हें यह मौका नहीं दिया।


शैक्षणिक जीवन


स्पेंसर का स्वास्थ्य बचपन से ही नाजुक था और अंत समय तक रहा। कमजोर स्वास्थ्य के होने के कारण स्पेंसर को उनके माता-पिता ने किसी भी स्कूल में भर्ती नहीं किया था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके पिता और चाचा के द्वारा घर पर ही हुई थी। इंग्लैंड के शैक्षणिक क्षेत्र में स्पेंसर को कोई भी स्थान इसलिए नहीं मिला क्योंकि उन्होंने किसी भी विषय में महाविद्यालय या विश्वविद्यालय से औपचारिक शिक्षा नहीं प्राप्त की थीं। वे अपने समय के प्रसिद्ध विद्वान जॉन स्टूअर्ट मिल से बहुत अधिक प्रभावित थे। स्पेंसर की जीवशास्त्र में बचपन से ही रुचि थी इसलिए वे कीड़े-मकोड़ों को भी बड़े शौक से पालते थे। इसके अलावा यांत्रिकी में भी विशेष रुचि रखते थे।

17 वर्ष की आयु में सन 1837 में लंदन के बरमिंघम नगर में रेलवे रोड में सिविल इंजीनियर के पद पर नियुक्त हो गए। रेलवे लाइन एव रेलवे के पुलों के निर्माण के कार्य को आपने 11 वर्ष तक किया पर रेल कंपनी का काम बंद होने पर वे अपने घर लौट आए और यहां उन्होंने पढ़ना और सामाजिक लेखन करना शुरू किया। जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि स्पेंसर का स्वास्थ्य बचपन से ही खराब था। इस कारण उन्होंने किसी विद्यालय या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेकर औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी। उन्हें सामाजिक संपर्क में रहने का मौका नहीं मिला था, यही कारण है कि उनके विचारों में व्यक्तिवादी विचारधारा उभर कर सामने आई इसके अतिरिक्त खराब स्वास्थ्य होने के कारण वह एकांत प्रिय भी हो गए थे।


और उन्होंने अहस्तक्षेप की नीति को स्वीकार करना प्रारंभ कर दिया था। पर वह प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे इसलिए इंग्लैंड जैसे राजनीतिक वातावरण में रहकर उससे प्रभावित न होना स्पेंसर के लिए असंभव था।

वे इंग्लैंड की सामाजिक और राजनीतिक जीवन में रुचि लेने लगे थे। उन्होंने 1842 में नॉन नॉनकन्फोमिस्ट (Non Conformist) पत्रिका में लेख लिखा था जो सामाजिक और राजनीतिक जीवन से संबंधित था। इसके बाद स्पेंसर ने कई लेख लिखें और उनका प्रकाशन इस पत्रिका में। हुआ।


1848 में इंजीनियर के पद से त्यागपत्र दे दिया और इंग्लैंड के साप्ताहिक पत्रिका इकोनॉमिस्ट में उप संपादक हो गए। यहीं से उनके साहित्यिक जीवन की शुरुआत होती है। इस समय उनका संपर्क अनेक साहित्यकारों एवं राजनीतिज्ञों एवं विभिन्न विचारकों से हुआ स्पेंसर ने इस पत्रिका में लगभग 5 वर्षों तक लेखन कार्य और उसके संपादन का कार्य किया इसी के परिणामस्वरूप समाजशास्त्र और सामाजिक जीवन की ओर उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने सिर्फ 30 वर्ष की आयु में अपनी पहली पुस्तक सामाजिक स्थितिशास्त्र (Social Static) की रचना की और उसका प्रकाशन किया जिसमें उन्होंने सामाजिक उद्विकास के विचारों को प्रतिपादित किया।


हरबर्ट स्पेंसर के जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो बहुत कम लोगों के सामने आया कि वह अपने अकड़ और सनकी स्वभाव के कारण दूसरे लोगों से ज्यादा मिलना पसंद नहीं करते थे।

वह दूसरों की बातों को सुनना भी नहीं चाहते थे। कहा जाता है कि वह जब दूसरों से मिलते थे तो अपने कानों में रुई लगा दिया करते थे। यहां तक कि जब वे क्लब जाते थे तो उनके कानों में रुई लगी होती थी।


पत्रकारिता की नौकरी ने स्पेन्सर को एक नई दुनिया दिखा दी थी। वे पुस्तकें लिखने लगे थे। इस दौरान उनका संपर्क अनेक विद्वानों से हुआ पर जैसा कि हमने ऊपर कहा है हरबर्ट स्पेंसर का स्वास्थ्य प्रारंभ से ही ठीक नहीं था उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी। लेकिन 1853 में उनके चाचा की मृत्यु के बाद वसीयत के रूप में धन मिला। इसलिए उन्होंने इकोनॉमिस्ट की नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अपने लिए अनेक सहायक नियुक्त किए जो उनके लिए पुस्तक लिखने की सामग्री जमा करते थे। स्पेंसर ने इनके सहयोग से बहुत लेखन कार्य किया। स्पेंसर आजीवन अविवाहित रहे आपके बारे में किसी भी प्रकार की प्रेम प्रसंग का उल्लेख नहीं मिलता।

कहा जाता है कि उनकी दोस्ती जॉर्ज इलियट नामक बौद्धिक महिला से थी उससे विवाह नहीं कर सके। अगस्त कॉम्ट से जब उनकी पहली और आखिरी मुलाकात हुई थी तब कॉम्ट ने स्पेंसर को विवाह कर लेने का सुझाव दिया था। 1860 के दशक में स्पेंसर मानसिक रूप से बीमार पड़ गए। इस मानसिक बीमारी के कारण बिना उद्देश्य के दिन भर घूमते रहते थे। वे कुछ लिख नहीं पाते थे और न ही कुछ पढ़ते थे। लगभग डेढ़ वर्ष बाद ठीक होने पर भी वे अनिद्रा के शिकार हो गए कुछ समय बाद ठीक होने पर उन्होंने पुनः लेखन कार्य किया स्वास्थ्य ठीक न होने पर भी आपने सामाजिक विज्ञान पर अनेक पुस्तकें एवं लेख लिखें आप अपनी सारी आय पुस्तकों के प्रकाशन पर ही खर्च कर देते थे। 1868 के बाद स्पेंसर एक प्रमुख सामाजिक विचारक के रूप में उभरे उनकी पुस्तकों की बिक्री होने लगी इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और उनका शेष जीवन सुखमय बिता। 8 दिसंबर 1930 को 83 वर्ष की आयु में स्पेन्सर की मृत्यु हो गई।


बौद्धिक पृष्ठभूमि


स्पेंसर ने साहित्य दर्शन और इतिहास बहुत अधिक नहीं पढ़ा था। लेविस कोजर ने लिखा है कि संभवत: स्पेंसर अपनी दिमाग की सेहत के लिए दूसरों को पढ़ाना पसंद नहीं करते थे।

स्पेंसर ने अपनी आत्मकथा में इस बात को भी स्वीकार किया कि उन्होंने दर्शन का अध्ययन कभी भी गंभीर रूप से नहीं किया। उन्होंने इमानुएल कांट को कुछ पढ़ा परंतु पसंद नहीं किया। उनके व्यक्तिगत पुस्तकालय में थॉमस हॉब्स, जॉन लॉक, डेविड ह्यूम, कॉम्ट आदि की पुस्तकें नहीं थी। इसके विपरीत स्पेंसर ने एडम स्मिथ की 'वेल्थ ऑफ नेशन' विलियम हेनरी माल्थस की किताब 'एन एस्से ऑन पापुलेशन' डार्विन की ओरिजन आफ स्पीशीज' को पढ़ना पसंद किया। जॉन स्टुअर्ट मिल उनके परिचित थे मिल से वे थे। अगस्त कॉम्ट की पुस्तकों को उन्होंने पढ़ा था। स्पेंसर को कॉम्ट के अधिकतर विचार पसंद नहीं थे। बहुत ज्यादा प्रभावित


स्पेंसर अपने समय के थॉमस हक्सले आदि से प्रभावित थे। स्पेंसर हमेशा हक्सले की विद्वता की प्रशंसा करते थे पर उनके विचार हक्सले से मिलते नहीं थे। स्पेंसर को डार्विन का बुलडॉग कहा जाता था। डार्विन से बहुत पहले ही स्पेंसर ने विकास की धारणा को अपनाया था और योग्यतम की जीविता की धारणा को प्रस्तुत किया था। स्पेंसर दूसरे उद्विकासवादियों जैसे कि टाइलर, मार्गन, हेनरीमैन, मेकलेनन आदि के विचारों से परिचित थे। स्पेंसर ने लामार्क से उद्विकास की धारणा को अपनाया और बहुत दिनों तक वह लामार्क के सिद्धांत को मानते रहे। समकालीन विद्वानों में सबसे ज्यादा अपने मित्र जॉर्ज लीविस से प्रभावित थे। दर्शन संबंधी जानकारियां उन्होंने इन्हीं से ही प्राप्त की थी। स्पेंसर के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने जो विचार बौद्धिक विकास के आरंभिक दौर में विकसित किए थे। उसमें उन्होंने कोई भी गुणात्मक परिवर्तन अंत समय तक नहीं किया यही कारण है कि स्पेंसर अपने जीवन के अंतिम दिनों में उपेक्षित से हो गए थे लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में उनकी लोकप्रियता लगातार बनी रही। विलियम ग्राहम समनर उनसे बहुत अधिक प्रभावित थे बान्स और बेकर ने अपनी पुस्तक में समनर को अमरीकी पोशाक में हरबर्ट स्पेंसर के विश्लेषण से विभूषित किया था।