स्पेंसर के सामाजिक विकास के सिद्धांत के महत्वपूर्ण तत्व - Important Elements of Spencer's Theory of Social Development

 स्पेंसर के सामाजिक विकास के सिद्धांत के महत्वपूर्ण तत्व - Important Elements of Spencer's Theory of Social Development


स्पेंसर के अनुसार सामाजिक उद्विकास के सिद्धांत के कुछ महत्वपूर्ण तत्व इस प्रकार हैं।

1. सजातीयता की अस्थिरता (Instability of Homegeneity) सामाजिक उद्विकास का यह महत्वपूर्ण तत्व है। समाज में जो सजातीय तत्व होते हैं। वह कभी स्थिर नहीं होते। हमेशा परिवर्तनशील रहते हैं। इनकी परिवर्तनशीलता के कारण ही सजातीयता विजातीयता में बदलती है।


2. ज्यामितिक अनुपात (Geometrical Ration -(जहां समाज में सजातीयता समाप्त होती है। वहां पर विभेदीकरण उत्पन्न हो जाता है। समाज में एकीकरण समान गति से होता है। विभेदीकरण ज्यामितिक अनुपात से होता है। इसके परिणाम स्वरुप समाज की विरोधी शक्तियों में संतुलन बना रहता है।


3. एकीकरण (Segregation)- समाज में सजातीयता के तत्व समाप्त होने से विभेदीकरण आता है। और विभेदीकृत समूहों के समान लक्षणों के आधार पर उनमें एकीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती के है। जिसके परिणाम स्वरुप समान लक्षणों के आधार पर समाज अनेक समूह एवं संस्थाओं में विभक्त हो जाता है।


4. विभेदीकृत समूहों में असंतुलन (Equilibrium in umits)- जब समाज में विभिन्न विशेषताओं वाले समूहों का निर्माण हो जाता है। तब समाज अनेक संगठनों एवं संस्थाओं में विभक्त हो जाता है। और इन सब की विशेषताओं में विभिन्नता पाई जाती है। स्पेंसर के अनुसार उद्विकास में समाज जितने समूह एवं संस्थाओं में विभक्त होता है। उसमें संतुलन बना रहता है।