कॉम्ट की प्रमुख कृतियां - Important Works of Comte
कॉम्ट की प्रमुख कृतियां - Important Works of Comte
अगस्त कॉम्ट की प्रमुख कृतियां इस प्रकार हैं
-ए प्रॉस्पेक्टस ऑफ द साइंटिफिक वर्क्स रिक्वायर्ड फॉर द रीऑर्गेनाइजेशन ऑफ सोसाइटी (A Prospectus of tha Scientific Works for the Reorganisation of society) 1822 यह अगस्त कॉम्ट की पहली रचना थी। इसकी भूमिका सेंट साइमन के द्वारा लिखी गई और यही से कॉस्ट के दर्शन का प्रारंभ होता है। इस ग्रंथ में अगस्त कॉम्ट ने सामाजिक सुधार एवं सामाजिक पुनर्निर्माण की एक महत्वपूर्ण योजना प्रस्तुत की थी। तकनीकी कुशलता एवं सामाजिक नैतिकता के विकास को महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
पॉजिटिव फिलोसोफी (Positive Philosophy) 1830-1842 अगस्त कॉम्ट की यह पुस्तक 6 खंडों में लिखी गई और इस का प्रथम खंड 1830 में प्रकाशित हुआ था।
छठवां खंड 1842 में प्रकाशित हुआ। इस ग्रंथ में अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र के सैद्धांतिक आधारों का उल्लेख किया। इस ग्रंथ में विज्ञानों का वर्गीकरण समाजशास्त्र की आवश्यकता उसकी प्रकृति तथा चिंतन की तीनों अवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।
पॉजिटिव पॉलिटी (Positive Polity) 1851-1854 अगस्त कॉम्ट की इस पुस्तक का प्रकाशन चार खंडों में हुआ है। इस पुस्तक का प्रकाशन 1851 एवं 1854 के बीच हुआ। इस रचना में उनके विचारों का परिपक्व रूप देखने को मिलता है। इसमें मानवीय और सामाजिक प्रगति के आधार पर मानवीय इतिहास में एकता को दर्शाया गया है।
कैचिज्म पॉजिटिविज्म (Catchism of Positivism) 1852 इस पुस्तक में कॉम्ट ने एक तरफ निरंकुश जनतंत्र का समर्थन किया और दूसरी तरफ प्रेस और एवं सार्वजनिक सभाओं की स्वतंत्रता की मांग की है।
रेमंड एयर ने अगस्त कॉम्ट के दार्शनिक उद्विकास को उनकी कृतियों के आधार पर तीन अवस्थाओं में बांटा है:
(1) प्रथम अवस्था (1820-1826) इस अवस्था में कॉम्ट ने अपने समय के समाज का वर्णन किया तथा अपने अनेक लेख 'अप स्कूल' नामक पुस्तक में पुर्नप्रकाशित किए। इन लेखों में कॉम्ट ने इस बात पर बल दिया कि सामाजिक सुधार की मूल दशा बौद्धिक सुधार है।
(2) द्वितीय अवस्था (1830-1842) इस अवस्था में कॉम्ट की कोर्स दी फिलॉसफी पॉजिटिव कोट्स ऑफ पॉजिटिव फिलॉसफी' नामक महत्वपूर्ण कृति प्रकाशित हुई, जिसमें आपने समाजशास्त्र विषय की सैद्धांतिक रूप से व्याख्या की। तीन स्तरों के नियम और प्रत्यक्षवाद के दर्शन को प्रतिपादित किया।
(3) तृतीय अवस्था (1851-1854) इस अवस्था में कॉम्ट की दूसरी प्रमुख कृति 'पॉजिटिव क्वालिटी' प्रकाशित हुई जिसमें आपने मानवीय प्रकृति तथा समाज की प्रकृति के सिद्धांत के आधार पर मानवीय इतिहास में एकता को प्रतिपादित किया।
उपर्युक्त रचनाओं में कॉम्ट ने जिन विचारों एवं सिद्धांतों का प्रतिपादन किया उनमें से प्रमुख हैं प्रत्यक्षवाद, चिंतन की तीन अवस्थाओं का सिद्धांत, विज्ञानों का वर्गीकरण, समाजशास्त्र एक नवीन विज्ञान के रूप में, सामाजिक पुनर्निर्माण, सामाजिक प्रगति का विचार, परिवार एवं मानवता का धर्म आदि।
वार्तालाप में शामिल हों