औद्योगिक समाज ,औद्योगिक समाज की विषेषताएं - Industrial Society, Characteristics of Industrial Society

 औद्योगिक समाज ,औद्योगिक समाज की विषेषताएं - Industrial Society, Characteristics of Industrial Society

सैन्य समाज के विकास के बाद औद्योगिक समाज का प्रारंभ होता है। सैन्य समाज में शासक वर्ग अपनी संपूर्ण शक्ति एवं धन सैनिक संगठन पर व्यय करता है। उसका प्रमुख उद्देश्य सैन्य बल को प्राप्त करना एवं उसे बढ़ावा देना होता है। सैन्य शक्ति को बढ़ाने एवं युद्ध करने से संतोष प्राप्त नहीं होता क्योंकि मानव समृद्धि भी चाहता है। हालांकि युद्ध से देश व समाज की समृद्धि भी हो सकती और विनाश भी हो सकता है। इसलिए मानव ऐसा मार्ग ढूंढने का प्रयास करता है जिससे देश में समृद्धि रहे और नुकसान न हो। इस समृद्धि के लिए राज्य एवं जनता दोनों उद्योगों के विकास की ओर ध्यान देने लगते हैं। जैसे ही लोगों का रुख औद्योगिक विकास की तरफ होने लगता है।

राजनीतिक विकास की दिशा सैनिकता से हटकर उद्योग की तरफ चली जाती है। ऐसे में सत्ता औद्योगिक समाज में परिवर्तित होने लगती है। राज्य के लिए उद्योगों का विकास साध्य हो जाता है। इन समाजों में सेना प्रमुख नहीं रहती। देश की समृद्धि प्रमुख हो जाती है। सेना द्वारा अन्य राज्यों पर आक्रमण करने की प्रवृत्ति भी कम होती जाती है। देश की आंतरिक शांति एवं बाहरी शत्रुओं से रक्षा करने के लिए ही सेना का प्रयोग किया जाता है। सैनिक समाज की तुलना में औद्योगिक समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं अधिकार का विचार प्रबल हो जाता है। व्यक्ति के जीवन में राज्य का हस्तक्षेप कम हो जाता है। व्यक्ति राज्य के लिए नहीं राज्य व्यक्ति के लिए है की विचारधारा जोर पकड़ने लगती है। जनता के प्रतिनिधियों का समाज में विशेष स्थान होता है। इस समाज में भी नेता, सलाहकार समिति तथा प्रतिनिधि समिति होती है। सैनिक समाज में नेता (मुखिया) प्रमुख होता है। औद्योगिक समाज में प्रतिनिधि प्रमुख होता है। उद्योगिक समाज में सार्वजनिक हितों की बात होती है।

और यही से जनतंत्र की शुरुआत होती है। स्पेंसर के अनुसार सैनिक समाज की अपेक्षा औद्योगिक समाज अधिक अच्छा है। इसके अंतर्गत मनुष्य को नैतिक विकास का अवसर प्राप्त होता है। आदर्श स्थिति तो वह होगी जब उद्योग के साधनों को मानव चरित्र के नैतिक आचार को पूर्ण विकसित करने की दिशा में लागू किया जा सकेगा और मानव चरित्र में सामाजिकता के गुण विकसित हो जाएंगे तथा उसके ऊपर बाहरी नियंत्रण की आवश्यकता नहीं होगी। यही उसके समाज के आदर्श व्यवस्था होगी जिसे स्पेंसर ने औद्योगिक समाज कहा है।


औद्योगिक समाज की विषेषताएं


औद्योगिक समाज में सैनिक कार्यकलाप तथा संगठन समाज के लिए बाहरी होते है। समाज मानव उत्पादन तथा कल्याण विषेष रूप से आर्थिक तथा सभ्य प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करता है। इस समाज में निम्नलिखित विषेषताएं पाई जाती है।


1. इसमें स्वैच्छिक सहयोग की प्रधानता होती है।


2. इन समाजों में व्यक्तियों के वैयक्तिक अधिकारों को दृढ़ता से माना जाता है।


3. सरकार के राजनैतिक नियंत्रण से आर्थिक क्षेत्र को अलग रखा जाता है।


 4. मुक्त समितियों एवं संस्थाओं का विकास होता है।


स्पेंसर का मानना था कि प्राचीन काल के समाज सैनिक समाज थे, पर आधुनिक समय में औद्योगिक होते है। सैन्य समाज का सामूहिक रूप संरक्षणवादी रूप में रहता हैं और औद्योगिक समाजों में व्यक्तिगत कार्य तथा सेवाओं के अनुसार समाज का निर्माण होता है। इसमे व्यक्तिवादीता प्रधान होती है तथा निजी सगठनों को प्रोत्साहित किया जाता है।