कौटिल्य का समाजशास्त्र - Kautilya's Sociology

 कौटिल्य का समाजशास्त्र - Kautilya's Sociology

प्राचीन भारतीय सामाजिक चिंतकों में कौटिल्य का विशेष स्थान है। इन्हें विष्णुगुप्त और चाणक्य के नाम से भी जाना है। कौटिल्य ने अपनी पुस्तक 'अर्थशास्त्र में प्राचीन भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक विचारधारा के विकास एवं विश्लेषण में अपूर्व योगदान दिया है। इसमें तत्कालीन सामाजिक चिंतन के साथ-साथ समाज में होने वाले भविष्यगत परिवर्तनों का पूर्वाभास भी किया गया है। इस ग्रंथ में वर्णाश्रम धर्म, शिक्षा, विवाह, (स्वरूप एवं नियम) स्त्री-पुरूष के आपसी कर्तव्य, विवाह विच्छेद, पुनर्विवाह, उत्राधिकार के नियम (दायभाग), स्त्रियों का समाज में स्थान, राजधर्म, राजव्यवस्था, न्यायव्यवस्था आदि जैसे विषयों पर अतिसूक्ष्म और विशद् विवेचन देखने को मिलता है। इकाई के इस भाग में हम कौटिल्य के प्रमुख सामाजिक चिंतन का अध्ययन करेंगे।