उत्तराधिकार का नियम , समाज में नारी की स्थिति - law of succession, position of women in society

  उत्तराधिकार का नियम , समाज में नारी की स्थिति - law of succession, position of women in society


कौटिल्य ने उत्तराधिकार के नियम का भी उल्लेख किया है जिसके अन्तर्गत वे उत्तराधिकार के दायभाग नियम का समर्थन करते हैं। जिसके प्रवर्तक जीमूतवाहन है। कौटिल्य ने लिखा है कि पिता या माता पिता दोनो के जीवित रहते हुए लड़के सम्पत्ति के उत्तराधिकारी नहीं होते, उनकी मृत्यु के बाद ही वें सम्पत्ति का बँटवारा आपस में कर सकते है। किसी लड़के द्वारा स्वयं उपार्जित सम्पत्ति का बँटवारा नहीं हो सकता पर यदि वह सम्पत्ति पिता की सम्पत्ति खर्च करके कमाई गयी हो तो उसका भी बँटवारा हो सकता है। जिसके कोई पुत्र न हो उसकी सम्पत्ति उसके सगे भाई ले लें और विवाह आदि के लिए जितना धन-आभूषण आवश्यक हो वह सब कन्या ले सकती है। यदि पिता जीवित रहते हुए अपनी सम्पत्ति का विभाजन करना चाहे तो किसी को ज्यादा या किसी कम ना देकर सबकों बराबर बॉट दें। 


समाज में नारी की स्थिति


कौटिल्य महिलाओं के लिए न्यायपूर्ण स्वतंत्रता की बात करते हैं, लेकिन अधर्म के रास्ते पर जाने से बचाने के लिए कुछ कड़े प्रतिबंधों का भी उल्लेख करते है। कौटिल्य बहुत कम उम्र में विवाह का समर्थन नहीं करते, उनके अनुसार कन्या 12 वर्ष की एवं पुरूष 16 वर्ष की आयु में विवाह योग्य होते है। वैवाहिक जीवन में नारी को पुरूष के अधीन करते हुए कौटिल्य ने यह घोषणा की कि स्त्री पुत्र पैदा करने के लिए ही है। कौटिल्य ने पति को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ अत्यन्त आदर और स्नेह पूर्वक व्यवहार करें, क्योकि इस प्रकार के परस्परिक स्नेह वा सम्मान भाव के आधार पर ही गृहस्थ जीवन के उच्चतर आदर्शों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति संभव है। साथ ही कौटिल्य ने नीच, परदेशी, प्रावासी, राजद्राही, हत्यारा, वर्ण और धर्म से पतित एवं नपुंसक पति से स्त्रियों को विवाह विच्छेद का भी अधिकार दिया। स्त्रियों को कौटिल्य ने विलासप्रिय, आवारा, नष्टचरित्र और धर्म विरूद्ध आचरणों को करने से रोकने के लिए कई दिशा निर्देशों एंव दण्ड़ विधियों का उल्लेख किया। कौटिल्य ने दास स्त्रियों तक प्रति असम्मान या तिरस्कार का भाव नही दिखाया है, महिला गुलामों के प्रति अनुचित व्यवहार या यौन संबंध स्थापित करने पर उनके मालिकों को उचित दण्ड देने का निर्देश दिया है।