विज्ञानों का संस्तरण - level of sciences

 विज्ञानों का संस्तरण - level of sciences

कॉम्ट समाजशास्त्र के जन्मदाता थे। समाजशास्त्र को एक सुदृढ़ आधार प्रदान करना चाहते थे। जिससे सामाजिक विज्ञानों में उसका स्थान महत्वपूर्ण रहे। इसलिए उन्होंने विज्ञान के विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया। अगस्त कॉम्ट ने अपनी प्रसिद्ध रचना 'पॉजिटिव फिलॉसफी' (Positive Philosophy) में विज्ञानों का एक व्यवस्थित वर्गीकरण प्रस्तुत किया है।


अगस्त कॉम्ट ने सेंट साइमन के विचारों से प्रभावित होकर विज्ञानों के वर्गीकरण को प्रस्तुत किया। वे बहुत हद तक साइमन के विचारों से सहमत थे पर उनका वर्गीकरण सेंट साइमन से कहीं अधिक वैज्ञानिक एवं भिन्न प्रकार का था। कॉम्ट ने विज्ञानों के वर्गीकरण द्वारा समाजशास्त्र को नवीन एवं जटिल विज्ञान प्रमाणित किया। जिसका क्षेत्र अन्य विज्ञानों की तुलना में अधिक व्यापक है। इस वर्गीकरण के पीछे कॉम्ट का प्रमुख उद्देश्य समाजशास्त्र को एक नवीन विज्ञान के रूप में सुदृढ़ आधार प्रदान करना था। इसी उद्देश्य से उन्होंने विज्ञानों का एक नवीन वर्गीकरण उच्चता एवं निम्नता के क्रम के आधार पर प्रस्तुत किया।

इसके माध्यम से वे प्रत्येक विज्ञान के विकास की स्थिति को स्पष्ट करना चाहते थे। समाजशास्त्र का अन्य विज्ञानों की शाखाओं से संबंध स्पष्ट करना चाहते थे, साथ ही यह स्पष्ट करना चाहते थे कि समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र अन्य विज्ञानों की अपेक्षा अधिक व्यापक है।


तीन स्तरों के नियम एवं प्रत्यक्षवाद के बाद विज्ञानों का वर्गीकरण कॉम्ट की प्रमुख देन है। कॉम्ट के बारे में जैसा कि बोगार्ड्स ने कहा है "कॉम्ट की योजना का तीसरा चरण विज्ञानों का वर्गीकरण था। इसके अंतर्गत समाजशास्त्र को नवीनतम किंतु सर्वश्रेष्ठ विज्ञान के रुप में दर्शाया गया है।”


कॉम्ट से पहले विज्ञानों का वर्गीकरण


अगस्त कॉम्ट का विज्ञानों का वर्गीकरण अपने ढंग का निराला था। कॉम्ट से पहले भी विज्ञानों का वर्गीकरण किया गया था। ग्रीक विचारकों ने तीन श्रेणियों में विज्ञानों का वर्गीकरण किया था।


1. भौतिकशास्त्र (Physics)


2. नीतिशास्त्र (Ethics ) 


3. राजनीति (Politics)


बेकन (Bacon) इंग्लैंड का एक विचारक एवं शिक्षाविद था। उसने भी विज्ञानों के वर्गीकरण को प्रस्तुत किया था। उसने मानसिक योग्यता के तीन पक्षों स्मरण शक्ति, कल्पना शक्ति और तर्क शक्ति को वर्गीकरण का आधार माना था और इसी के आधार पर विज्ञान को तीन भागों में स्पष्ट किया था।


इतिहास (History) - इतिहास मानसिक योग्यता पर आधारित पहला विज्ञान था। बेकन ने स्मरण शक्ति को इस विज्ञान का आधार बताया। उनके अनुसार भूतकाल की जो घटनाएं हमें याद रहती हैं उसे इतिहास में सम्मिलित किया जाता है।


काव्यशास्त्र (Peotry) - बेकन के अनुसार दूसरा विज्ञान काव्यशास्त्र है। काव्य का आधार कल्पनाशक्ति है। काव्य में ही मानव की कल्पनाएं समाहित होती हैं।


विज्ञान (Science) बेकन के अनुसार का तीसरा भाग विज्ञान है। जिसमें बुद्धि, विवेक एवं तर्कशक्ति को प्रमुख आधार माना गया है। इसके अंतर्गत प्रत्यक्ष घटनाएं सम्मिलित होती हैं।



विज्ञानों के वर्गीकरण का आधार


अगस्त कॉम्ट के द्वारा विज्ञानों का जो वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है के निम्न आधार हैं


1. विज्ञानों के वर्गीकरण का पहला प्रमुख आधार यह है कि संसार की सभी घटनाएं चिंतन के तीन प्रमुख क्रमों से गुजरती हैं। जब सभी घटनाएं तीन क्रमों से गुजरती हैं तो विज्ञान को भी इन्हीं तीनों क्रमों से गुजरना पड़ता है। क्योंकि विज्ञान भी प्राकृतिक घटना का ही एक भाग है।


2. प्रारंभिक काल से वर्तमान काल तक जीवन और जगत की घटनाओं का अध्ययन करने वाले विज्ञानों की संख्या अनेक है। लेकिन यदि हम विकास की अवस्था में देखें तो सभी विज्ञान एक समान नहीं है। कुछ विज्ञान अधिक विकसित हो गए हैं जबकि कुछ का विकास होना अभी बाकी है। इस प्रकार कॉम्ट ने निष्कर्ष निकाला कि कुछ विज्ञान धार्मिक अवस्था में, कुछ तार्किक अवस्था में और कुछ प्रत्यक्षवाद अवस्था में हैं।


3. कॉम्ट का कहना है कि प्रत्येक विज्ञान को इन तीनों अवस्थाओं से होकर गुजरना पड़ता है। प्रत्येक अवस्था में विज्ञान का स्वरूप अलग-अलग था।

इस प्रकार विज्ञानों के वर्गीकरण में प्रत्येक स्तर का स्वरूप भिन्न-भिन्न है।


विज्ञानों के वर्गीकरण के नियम


प्रत्येक विज्ञान का संबंध किसी न किसी विषय या अनिश्चित घटना से होता है। जिसका अध्ययन विज्ञान में किया जाता है और उसी के माध्यम से विज्ञान की प्रकृति निर्धारित होती है। कॉम्ट के विज्ञानों के वर्गीकरण का आधार भी यह तथ्य है। जैसा कि हमें ज्ञात है कि विज्ञानों के वर्गीकरण का विचार कॉम्ट को सेंट साइमन से मिला था। कॉम्ट साइमन के इन विचारों से सहमत तो थे किंतु विज्ञानों का वर्गीकरण वैज्ञानिक ढंग से किया जाना चाहिए पर वे सेंट साइमन की वर्गीकरण से सहमत नहीं थे। उनका दावा था कि सेंट साइमन से अधिक वैज्ञानिक आधार पर वे विज्ञानों का वर्गीकरण प्रस्तुत कर सकते हैं। अगस्त कॉस्ट का • पॉजिटिव फिलॉसफी' (Positive Philosophy) लिखने का उद्देश्य अपने नवीन विज्ञान समाजशास्त्र के लिए दृढ़ तथा वैज्ञानिक नींव को ढूंढना था। जिससे कि समाजशास्त्र का अध्ययन क्षेत्र और उसका अन्य विज्ञानों से संबंध स्पष्ट हो जाए इसी उद्देश्य से कॉम्ट ने विज्ञानों के एक नवीन वर्गीकरण को दो आधार पर प्रस्तुत किया है


1. पराश्रयता या निर्भरता वृद्धि क्रम का सिद्धांत


2. घटती हुई सामान्यता एवं बढ़ती हुई जटिलता का सिद्धांत