मनु के अनुसार विवाह संस्कार - Marriage rites according to Manu

 मनु के अनुसार विवाह संस्कार - Marriage rites according to Manu

विवाह संस्कार स्त्री-पुरूष को गृहस्थ में प्रवेश कराने वाली संस्था है। मनु ने एक विवाह' प्रथा को मान्यता देते हुए चारों वर्णों के लिए अच्छे-बुरे आठ प्रकार के विवाहों को उल्लेख किया है जो निम्नलिखित है


1. ब्रह्म विवाह


2. दैव विवाह


3. आर्ष विवाह


4. प्रजापात्य विवाह


5. असुर विवाह 


6. गन्धर्व विवाह


7. राक्षस विवाह


8. पैशाच विवाह


मनु ने ब्रह्ममणों के लिए क्रमशः ब्राम्हा, दैव, आर्ष, प्राजापत्य, असुर तथा गन्धर्व यह छः प्रकार के विवाह मान्य है। और क्षत्रियों के लिए आर्ष, प्राजापत्य, असुर व गन्धर्व विवाह मान्य है। वैश्यों और शूद्रो में भी ये चार प्रकार के विवाह मान्य है। मनु के अनुसार व्यक्ति प्रथमतः अपने ही वर्ण में विवाह करें। परन्तु ऐसा न होने पर ब्रह्ममण को क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र की कन्या से, क्षत्रिय को वैश्य एवं शूद्र की कन्या से, वैश्य को शूद्र की कन्या से विवाह कर लेना चाहिए। मनु शूद्र को केवल शूद्र वर्ण में ही विवाह की अनुमति देते है।


मनु के सामाजिक चिंतन का अध्ययन करने से स्पष्ट पता चलता है कि इन्होंने समाज के सभी पहलुओं का गहनता के साथ चिंतन करते हुए अपना विचार दिया जिससे सामाजिक व्यवस्था बनी रहे। मनु ने इस सामाजिक व्यवस्था में व्यक्ति के अपेक्षा समूह, समुदाय और समाज को महत्व दिया है। मनु का यह सामाजिक चिंतन भले ही धर्म, दर्शन, कल्पना, एवं भावना से प्रभावित रहा हो लेकिन भारत के समाजशास्त्रीय चिंतन में इनका विचार आज भी विमर्श का विषय बना हुआ है।