मैक्स वेबर की आलोचना - Max Weber's Criticism
मैक्स वेबर की आलोचना - Max Weber's Criticism
मैक्स वेबर ने कुछ वस्तुनिष्ठ तथ्यों के आधार पर अर्थव्यवस्था एवं धर्म के संबंध को सिद्ध करने का प्रयास किया है लेकिन उनके विचार कुछ रूपों में आलोचनाओं से रहित नहीं है। सुविचार सत्यता के निकट होते हुए भी पूर्णतया सत्य नहीं है। वेबर ने धर्म के समाजशास्त्र की व्याख्या में अनेक स्थानों पर पूर्वाग्रह से युक्त विचार प्रस्तुत किए हैं कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न धर्मों की नीतियों का अध्ययन करते समय वेबर केवल उन्हीं नीतियों को प्रकाश में लाना चाहते थे जो उनकी परिकल्पना को प्रमाणित कर सके इस आधार पर उनके सिद्धांत की अनेक आलोचनाएं की गई है
1. मैक्स वेबर ने अपने अध्ययन में बताया कि सभी घटनायें एक दूसरे से संबंधित हैं तथा एक दूसरे को प्रभावित करती हैं पर उन्होंने स्वयं सामाजिक या आर्थिक संरचना में परिवर्तन की व्याख्या के लिए केवल एक कारक अर्थात धार्मिक कारक को महत्वपूर्ण मानकर अध्ययन किया है।
2. मैक्स वेबर ने धार्मिक नीतियों की विवेचना में तो ऐतिहासिक काल से लेकर वर्तमान सुधारात्मक आंदोलन तक की चर्चा की है लेकिन उन्होंने भारत, चीन तथा इजराइल में अतीत की उन आर्थिक उपलब्धियों अथवा अवसरों पर विचार नहीं किया जो कि वेबर की धारणा के अनुरूप विकसित तर्कवाद पर आधारित थी।
3. मैक्स वेबर ने प्रोटेस्टेंट बाद और पूंजीवाद में एकतरफा संबंध बताया। यदि हम उनका विचार माने कि आर्थिक विकास ने पूंजीवादी व्यवस्था को जन्म दिया है तब उनका यह विचार उचित प्रतीत नहीं होता कि धर्म एवं अर्थव्यवस्था अंतर संबंधित है एवं दूसरों को प्रभावित करती हैं यदि उनका यह विचार माना जाए की धार्मिक तथा आर्थिक घटनाएं एक दूसरे को प्रभावित करती हैं तब पूंजीवाद के विकास का कारण प्रोटेस्टेंटवाद को बताना उचित प्रतीत नहीं होता।
4. बेनेडिक्ट का कथन है कि धार्मिक नीतियों पर केवल इसी दृष्टिकोण से विचार करना पर्याप्त नहीं है कि उन्होंने आर्थिक विकास में कितना कम या अधिक योगदान दिया बल्कि उन पर कुछ विभिन्न रूप से भी विचार करना आवश्यक है।
5. इस तथ्य की भी अवहेलना नहीं की जा सकती कि पश्चिम में पूंजीवाद का विकास केवल प्रोटेस्टेंट नीतियों का ही परिणाम नहीं है बल्कि वह पश्चिम की सांस्कृतिक विरासत से भी संबद्ध है।
6. सोरोकिन के अनुसार वेबर का यह सिद्धांत दोषपूर्ण है उन्होंने बताया कि जापान में बीसवीं शताब्दी में धर्म के क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं हुआ किंतु वहां की आर्थिक सामाजिक तथा राजनीतिक व्यवस्था में आश्चर्यजनक प्रगति हुई।
7. सोरोकिन के अनुसार मैक्स वेबर ने अत्यंत संकीर्ण आंकड़ों तथा सीमित अध्ययनों के आधार पर एक पक्षीय कार्य-कारण संबंध की व्याख्या की है।
8. सोरोकिन ने वेबर की इस आधार पर भी आलोचना की है कि उन्होंने आर्थिक और धार्मिक कारकों को ही सर्वाधिक महत्व दिया है और अन्य कारकों की उपेक्षा की है।
9. मैक्स वेबर ने ऐतिहासिक पद्धति के आधार पर प्रोटेस्टेंटवाद एवं पूंजीवाद के संबंधों की चर्चा की है ऐतिहासिक पद्धति एक वैज्ञानिक पद्धति नहीं है इस पद्धति के आधार पर प्रतिपादित निष्कर्षों की विश्वसनीयता भी संदिग्ध रहती है।
10. रेमंड एरन का विचार है कि मैक्स वेबर ने केवल मूल्यों को ही आधार मानकर आर्थिक विकास को समझाने का प्रयास किया है।
11. ए. डब्ल्यू गोल्डनर ने लिखा है कि मैक्स वेबर ने धार्मिक विचारों को अधिक महत्व दिया है और पूंजीवाद प्रोटेस्टेंटवादी विचारधारा को अपनाने का परिणाम है ऐसा मैक्स वेबर मानते थे यह एक विचारणीय प्रश्न है
उपरोक्त आलोचनाओं के बाद भी यह स्पष्ट है कि मैक्स वेबर का धर्म और पूंजीवाद संबंधी विचार समाज का एक महत्त्वपूर्ण योगदान है।
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