सामाजिक मानवविज्ञान का अर्थ और परिभाषा - Meaning and Definition of Social Anthropology

 सामाजिक मानवविज्ञान का अर्थ और परिभाषा - Meaning and Definition of Social Anthropology


सामाजिक मानवविज्ञान को एक वाक्य में परिभाषित कर पाना बहुत ही जटिल कार्य है। सामाजिक मानवविज्ञान एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न “मानव होने का क्या तात्पर्य है?” को संबोधित करता है। इस प्रश्न के उत्तर हेतु वह विश्व के अलग-अलग स्थान में रहने वाले लोगों में अपने जीवन को व्यवस्थित करने के लिए बनाये गए परिवार, समुदाय, उनके आस-पास की दुनिया के बारे में और एक अच्छा जीवन जीने से संबंधित विचारों का अध्ययन करता है। इवांस प्रिचार्ड के अनुसार सामाजिक मानवविज्ञान में सभी मानव संस्कृतियों और समाजों का अध्ययन शामिल है। मूल विचार यह है कि यह दुनिया भर के मानव समाजों की संरचना का पता लगाने की कोशिश करता है। सामाजिक मानवविज्ञान यह स्थापित करना चाहता है कि समाज किसी भी देश का हो वह एक संगठित समष्टि दर्शाता है। इन समाजों में सिर्फ रीति-रिवाज या मान्यताएं ही अलग-अलग नहीं है बल्कि काम करने, रहने, शादी करने, पूजा करने, राजनीतिक आयोजन करने आदि में भी भिन्न हैं। सब कुछ अलग है क्योंकि इन संरचनाओं, योजनाओं के पीछे जो विचार हैं वे अलग हैं।

सामाजिक मानवविज्ञान, एक तरफ, विभिन्न जनजातीय लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं का अध्ययन करता है तथा दूसरी ओर यह आदिवासी सामाज के बीच पाई जाने वाली समानताओं का भी विश्लेषण करता । वास्तव में, जब हम आदिवासी अर्थव्यवस्था को समझने की कोशिश करते हैं तो एक विशेष समूह, उदाहरण के लिए मुंडा जनजाति, हम यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि यह अर्थव्यवस्था किस तरह से मुंडा समाज के अन्य पहलू से जुड़ी है। जॉन लुईस ने सामाजिक मानवविज्ञान को बहुत ही रूढ़िवादी शैली में परिभाषित किया है। उनके अनुसार सामाजिक मानवविज्ञान सामाजिक संस्थाओं के अध्ययन का एक तुलनात्मक अनुशासन है। हालाँकि सामजिक मनाविज्ञान को आदिम समाज के अध्ययन तक सिमित करने के बावजूद भी, लुईस यह सुझाव देते हैं कि इसका उपयोग देशज समाज के अध्ययन के लिए भी किया जा सकता है।


दूसरी ओर एरिकसेन का मनना है कि सामाजिक मानवविज्ञान में लघु स्थानों के समाजों के अध्ययन पर जोर दिया जाता है। वह तर्क देते हैं कि भले ही सामाजिक मानवविज्ञान का संबंध लघु स्थानों के समाजों से है, लेकिन ये उनके बड़े मुद्दों को संदर्भित करता है।


पिडिंगटन के अनुसार, “सामाजिक मानवविज्ञानी समकालीन आदिम समुदायों की संस्कृतियों का अध्ययन करते हैं। सामाजिक मानवविज्ञान की यह परिभाषा थोड़ी संकीर्ण है क्योंकि मानवविज्ञान में केवल आदिम संस्कृतियों का अध्ययन नहीं बल्कि समकालीन संस्कृतियों का भी अध्ययन करते हैं।


एस० सी० दुबे ने सामाजिक मानवविज्ञान को मानवविज्ञान के उस हिस्से के रूप में परिभाषित किया जिसमें संस्कृति के भौतिक पहलुओं के बजाय सामाजिक संरचना और धर्म के अध्ययन पर प्राथमिक ध्यान दिया जाता है। यह स्पष्ट है कि सामाजिक मानवविज्ञान सामाजिक संरचना जैसे सामाजिक संस्था, सामाजिक संबंध और सामाजिक गतिविधियों आदि के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करता है।


चार्ल्स विनिक ने कहा है कि सामाजिक मानवविज्ञान सामाजिक व्यवहार का अध्ययन है, विशेष रूप से सामाजिक रूपों और संस्थानों के व्यवस्थित तुलनात्मक अध्ययन है।


संक्षेप में, सामाजिक मानवविज्ञान सभी देशों और युगों के मनुष्य के सामाजिक व्यवहार और सामाजिक घटनाओं का तुलनात्मक अध्ययन है।