संस्कृति के अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and definitions of culture
संस्कृति के अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and definitions of culture
"संस्कृति' शब्द संस्कृत भाषा से अनुग्रहित किया गया है। 'संस्कृति' तथा 'संस्कृत' दोनों ही शब्द ‘संस्कार’ से निर्मित हुये हैं। संस्कार का आशय कुछ कृत्यों/कर्मों को करने से है। सनातन धर्म (हिंदू धर्म) में अनेक संस्कारों (मुख्य रूप से सोलह) का विवरण मिलता है तथा इन संस्कारों को व्यक्ति अपने जन्म से मृत्यु तक पूरा करता है। संस्कृति का अर्थ होता है विभिन्न संस्कारों की सहायता से समूहिक जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करना। संस्कृति एक प्रकार से परिमार्जन की प्रक्रिया है। कोई भी मनुष्य अपने संस्कारों को पूर्ण कर ही एक सामाजिक प्राणी बनता है।
विद्वानों द्वारा संस्कृति शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों में किया गया है। क्रोबर तथा क्लूखौन ने अध्ययन किया तथा बायता कि संस्कृति शब्द की 108 परिभाषाएँ हैं। साहित्यकारों द्वारा इसकी परिभाषा सामाजिक आकर्षण तथा बौद्धिक श्रेष्ठता को दर्शाने के लिए प्रस्तुत की गई।
कुछ समाजशास्त्रियों द्वारा बौद्धिक नेताओं के लिए ‘सांस्कृतिक आभिजात' शब्द का प्रयोग किया गया है, तो कुछ समाजशास्त्रियों ने संस्कृति का प्रयोग मानव की नैतिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक उपलब्धियों को स्पष्ट करने के प्रयोजन से किया। नैतिक दृष्टि से संस्कृति का संबंध ईमानदारी, आदर्श नियमों, नैतिकता तथा सद्गुणों आदि से है।
कुछ प्रमुख विद्वानों द्वारा प्रस्तुत की गई संस्कृति की परिभाषा इस प्रकार है
टायलर के अनुसार,
“संस्कृति वह जटिल समग्रता है जिसमें ज्ञान, विश्वास, कला, आचार, कानून तथा ऐसी ही अन्य क्षमताओं और आदेशों का समावेश है जो समाज का सदस्य होने के नाते मनुष्य प्राप्त करता है। "
हस्कोविट्स के शब्दों में,
"पर्यावरण का मानव निर्मित भाग ही संस्कृति है।"
मैकाइवर और पेज के अनुसार,
"यह मूल्यों, शैलियों, भावात्मक अभियानों का संसार है। इसलिए संस्कृति सम्मता का साहित्य, धर्म, मनोरंजन तथा आनंद से हमारी अभिव्यक्ति है। "
मजूमदार तथा मदान ने मानव के जीने के तरीके को ही संस्कृति का नाम दिया है।
रॉबर्ट बीरस्टीड के अनुसार,
"संस्कृति वह सम्पूर्ण जटिलता है जिसमें वे सभी वस्तुएँ शामिल हैं जिनपर हम विचार करते हैं, कार्य करते हैं. और समाज के सदस्य होने के नाते अपने पास रखते हैं।"
फेयरचाइल्ड के शब्दों में,
“प्रतिकों द्वारा सामाजिक रूप से प्राप्त और संचारित सभी व्यवहार प्रतिमानों के लिए सामूहिक नाम संस्कृति है।"
हॉबेल के अनुसार,
"संस्कृति सीखे हुये व्यवहार प्रतिमानों का कुल योग है जो किसी समाज के सदस्यों की विशेषता है, जो किसी प्राणिशास्त्रीय विरासत का परिणाम नहीं है। "
लैडिस के अनुसार,
"संस्कृति वह संसार है जिसमें एक व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक निवास करता है, चलता-फिरता है और अपने अस्तित्व को बनाए रखता है। "
ब्रूम एवं सेल्जनिक का मानना है, "संस्कृति एक सामाजिक विरासत है।"
प्रस्तुत सभी परिभाषाओं के आलोक में हम यह प्रस्तावित कर सकते हैं कि संस्कृति एक अत्यंत जटिल संकल्पना है तथा इसके संबंध में विद्वानों में कोई एक मत नहीं है। सरल रूप में, संस्कृति को किसी समाज विशेष के समग्र जीवन विधि अथवा उसके सम्पूर्ण व्यवहार प्रतिमानों के तौर पर समझा जा सकता है।
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