सामाजिक प्रतिमान का अर्थ , परिभाषाएं - Meaning and definitions of social model
सामाजिक प्रतिमान का अर्थ , परिभाषाएं - Meaning and definitions of social model
सामाजिक प्रतिमान किसी सामाजिक व्यवस्था में ऐसे व्यवहार के सामाजिक पहलुओं को नियमित करने वाले नियमाचारों के रूप में चिन्हित किये जाते हैं जो कि सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न अवयवों को नियंत्रित करने का कार्य करते है जिसके कारण सामाजिक व्यवस्था की प्रकार्यात्मक एकता बनी रहती है और समाज उत्तरोत्तर एक स्तर से दूसरे स्तर में प्रवेश करता है, समाज के विभिन्न निर्णायक इकाइयों को अपनी अपनी निर्धारित क्रियाओं में रत रखने में ये आदर्शप्रतिमान बहुत सहायक होते हैं। वस्तुतः आदर्शप्रतिमान सामाजिक व्यवस्था की प्रत्येक इकाई को नियंत्रित करने के महत्वपूर्ण साधन हैं। जनारितियाँ, प्रथाएं रूढ़ियाँ, संस्थाएं, परम्पराएँ, कानून, फैशन, धुन नैतिकता एवं धर्म आदि ऐसे विभिन्न आदर्शप्रतिमान हैं जिनके अनुरूप प्रत्येक समाज अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के उद्देश्य से अभिप्रेरित व्यक्ति विभिन्न प्रकार की अन्तः क्रियाएं करते हैं।
प्रत्येक समाज के आदर्शप्रतिमान सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अनुसार पृथक-पृथक होते हैं और उन्ही के अनुरूप में सामाजिक व्यवस्था विकसित होती है। ये आदर्शप्रतिमान ही सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखते हैं। इन्ही की क्रियाशीलता पर सामाजिक व्यवस्था आधारित रहती है। इन्हें आदर्श इसलिए कहा जाता है कि समाज द्वारा मान्य एवं स्वीकृत होती हैं तथा समाज की आवश्यकताओं, लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के अनुरूप होते हैं। इस प्रकार सामाजिक आदर्शप्रतिमान किसी समूह द्वारा विकसित, मान्य और स्वीकृत वे मानदण्ड है, जिनके द्वारा समूह के सदस्यों के व्यवहारों का न केवल नियमन, वरन नियंत्रण भी होता है।
1. सामाजिक जीवन में सामाजिक प्राणियों के रूप में किसी विशेष समूह की अन्य सदस्यों द्वारा स्वीकृति अथवा नियमितता का निरीक्षण, उस व्यवहार विशेष की समूह के अन्य सदस्यों द्वारा स्वीकृत या अस्वीकृत व्यवहार को मानदण्ड के रूप में देखा जाता है।
2. किसी एक समूह की परिस्थिति विशेष में किसी व्यवहार विशेष की आवृत्ति और नियमितता का निरीक्ष
3. समूह के अन्य सदस्यों की विधियों के विषय में राय।
जब कोई व्यवहार एक निश्चित प्रकार से बार-बार घटित होता है तो उसे व्यवहार की नियमितता कहा जाता है। व्यवहार नियमितता सामाजिक आदर्शप्रतिमान की उपस्थिति का निर्धारण करती है। सामाजिक आदर्शप्रतिमानों की शक्ति में विभिन्नता होती है। यदि कोई कार पार्किंग के निषेधों की अवहेलना करता है तो यह कुछ सीमा तक क्षम्य है। किन्तु यदि कोई किसी व्यक्ति की हत्या कर दे तो समूह इसे जल्दी सहन नहीं करता है। कोई व्यवहार किस सीमा तक अपेक्षित है, इसका निर्धारण इस बात से हो सकता है की उस व्यवहार के समर्थन में किस मात्रा में सामाजिक दबाव का प्रयोग किया जाता है।
सामाजिक प्रतिमान की परिभाषाएं
1. राबर्ट बिरस्टीड अपनी रचना 'दी सोशल आर्डर' में सामाजिक आदर्शप्रतिमान को परिभाषित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किया है कि “एक आदर्शप्रतिमान एक नियम या मानदण्ड है जो सामाजिक परिस्थितियों, जिसमे हम सहभागीदार होते हैं में हमारे आचरण को नियंत्रित करता है।
यह एक सामाजिक प्रत्याशा है। यह एक मानदण्ड है जो हमसे एक विशेष प्रकार का व्यवहार करने की आशा करती है, चाहे वास्तव में हम वैसा व्यवहार करें या नहीं, यह एक सांस्कृतिक विनिर्देशन है जो समाज में हमारे आचरण को मार्गदर्शित करता है। यह कार्यों को करने का एक तरीका है, जिसे समाज द्वारा हमारे लिए निर्धारित किया गया है। यह सामाजिक नियंत्रण का आवश्यक उपकरण है।
2. किंग्सले डेविस ने अपनी पुस्तक 'ह्यूमन सोसाइटी' में सामाजिक आदर्शों को परिभाषित करते हुए लिखा है कि "वे (सामाजिक आदर्श)” नियंत्रक हैं। इनके माध्यम से ही मानव समाज अपने सदस्यों के व्यवहार को इस प्रकार नियमित करता है कि वे सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ती करते हुए कार्य सम्पादित करते रहे, भले ही कभी-कभी उनकी प्राणीशास्त्रीय आवश्यकताओं की पूर्ती में इससे बाधा पहुंचती हो।
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