श्रम विभाजन का अर्थ - Meaning of division of labor

 श्रम विभाजन का अर्थ - Meaning of division of labor


श्रम विभाजन के सिद्धांत को सामाजिक दृष्टिकोण से देखने की शुरुआत उन्नीसवीं शताब्दी से मानी जाती है। इसलिए हम श्रम विभाजन की उत्पत्ति को आधुनिक नहीं मानते। एडम स्मिथ ऐसे प्रथम विद्वान थे जिन्होंने श्रम विभाजन के सिद्धांत को प्रस्तुत किया। उनका सिद्धांत केवल आर्थिक जगत तक ही सीमित था। आज हम श्रम विभाजन को आर्थिक जगत तक ही सीमित नहीं रखते हैं अपितु आज समाज के सभी क्षेत्रों में इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जा रहा है। यही कारण है कि आज राजनीतिक, प्रशासनिक तथा न्यायिक कार्य अधिकाधिक विशेषीकृत होते जा रहे हैं। श्रम विभाजन का अर्थ व्यक्तियों की भूमिकाओं या कार्यों के वितरण से है। किसी भी क्षेत्र में जैसे-जैसे श्रम विभाजन बढ़ता जाता है, कार्यों में विशेषीकरण आता जाता है। दुर्खीम का कहना है कि श्रम विभाजन का अर्थ केवल भूमिकाओं में विशेषीकरण से नहीं है अपितु भूमिकाओं के समन्वय से भी है। समाज जैसे-जैसे प्रगति करता जाता है उसमें कार्यों का विशेषीकरण बढ़ता जाता है क्योंकि प्रगति के कारण व्यक्ति एक दूसरे पर आश्रित होते जाते हैं आधुनिक समाज में सामाजिक एकता का प्रमुख आधार श्रम विभाजन है। अर्थात समाज के व्यक्ति एक दूसरे पर निर्भर हैं एक दूसरे पर आश्रित है।