सामाजीकरण के साधन - means of socialization
सामाजीकरण के साधन - means of socialization
सामाजीकरण करने वाले कारक तत्व या साधन सामाजीकरण की प्रक्रिया जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में समाज की विभिन्न संस्थाओं का योगदान रहता है। सामाजीकरण में सहायता प्रदान करने वाले प्रमुख कारक तत्व या साधन निम्न प्रकार है
• परिवार
सामाजीकरण का सबसे प्रमुख महत्वपूर्ण साधन परिवार है बच्चे का परिवार में जन्म होता है और वह विद्यालय जाने के पूर्व तक उसका सामाजीकरण परिवार में होता है। किम्बल यंग के अनुसार, "समाज के अन्द सामाजीकरण के विभिन्न साधनों में परिवार सबसे अधिक महत्वपूर्ण साधन । बालक का जन्म परिवार में होता है और उसका प्रारंभिक विकास परिवार में होता है परिवार में ही वह खाना-पीना, उठना-बैठना चलना-फिरना, बोलना, कपड़े पहनना, पूजा करना आदि कार्यों को सीखता है। परिवार में ही वह समाज के नियमों का प्रारम्भिक एवं व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करता है।
परिवार में वह, प्रेम, सहयोग, दया, क्षमा, त्याग, सहनशीलता, और कर्तव्य परायणता आदि सामाजिक गुणों को सीखता है। व्यक्ति जीवन परिवार में रहता है और परिवार समाज की एक इकाई है अतः परिवार सामाजीकरण का सबसे अधिक स्थायी साधन है। परिवार के सदस्य, माता पिता, भाई-बहिन, दादा-दादी, चाचा-चाची से बालक अच्छा-बुरा उचित-अनुचित, सही-गलत आदि का ज्ञान प्राप्त करते हैं। परिवार के सहयोगी एवं भावात्मक वातावरण का अनुकूल प्रभाव बालक के सामाजीकरण पर पड़ता है जबकि अपराधी विकृत विघटित परिवारों का बालक के सामाजीकरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
• विद्यालय ( School)
बालक के सामाजीकरण का दूसरा प्रमुख साधन विद्यालय है। यह सामाजीकरण का एक औपचारिक साधन है। विद्यालय बालक को उसकी सभ्यता और संस्कृति से परिचित कराता है। यहाँ उसे समाज के मूल्य एवं मान्यताओं के विषय में जानकारी दी जाती है
और उसे उनके अनुसार आचरण करने के लिए प्रेरित किया जाता है। विद्यालय में सामाजीकरण के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है वे इस प्रकार है-
• विद्यालय में सामूहिक कार्य जैसे साफ-सफाई, नाटक, केम्प का आयोजन किया जाता है जिससे उनमें आपस में सहयोग की भावना विकसित होती है।
• प्रार्थना, सुविचार से उनमें मूल्यों का विकास होता है।
• एन.जी.जी एन. एस. एस से सहयोग एवं अनुशासन का विकास होता है।
• जन अभियान, जैसे साफ-सफाई निरक्षरता स्वास्थ्य जागरुकता अभियान सहयोग की भावना को विकसित करते है।
• खेल कूद सांस्कृतिक आयोजन, से उनमें प्रतिस्पर्धा एवं सांस्कृतिक की जानकारी मिलती है।
• राष्ट्रीय त्यौहार मनाने से देशभक्ति, साहस, त्याग आदि गुण विकसित होते है। इस प्रकार हम कह सकते है कि विद्यालय समाज का एक छोटा रूप होता है इसमें विभिन्न जाति वर्ग प्रान्त के छात्र एक साथ रहकर एक दूसरे के व्यवहार को सीखते है और उनका सामाजीकरण होता है।
• आस-पड़ौस एवं संगी-साथी-
बालक के सामाजीकरण में उसके आस-पड़ौस और संगी साथी का भी प्रभाव पड़ता है अतः ये भी सामाजीकरण के साधन या कारक है। बालक परिवार से निकलकर अपने आ-पड़ौस संगी-साध्क्षी के संपर्क में आता है। उनके साथ उठता-बैठत है खेलता है बात करता है लड़ता है सहयोग करता है उसके घर आता जाता है उसके रीति रिवाज समझता है सीखता है पड़ोस ही उसको अच्छी या बुरी संगति प्रदान करता है। अच्छी संगति उसका विकास एवं बुरी संगती उसके पतन का कारण बनती है। आस-पड़ौस के लोग अच्छे सभ्य हो तो बालक का सामाजीकरण उचित रूप से तीव्र गति से होता है।
• जाति
बालक के सामाजीकरण का एक प्रमुख साधन जाति है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति की रीतियाँ, परम्पराये मूल्य और आदर्श सीखता है। इसी कारण प्रत्येक जाति के बालकों का सामाजीकरण भी अलग-अलग होता है। यदि हमारे संविधान के अनुसार कोई वर्ग भेद नहीं है परन्तु के कुछ जातियाँ अपने आप को उच्च समझती है। जिसके कारण इन जातियों के बालकों में अहम या अभिमान की भावना पैदा हो जाती है। तथा दूसरी जाति के बालकों में हीनता की भावना आ जाती है जो समाजीकरण के लिए अच्छा नहीं है।
• समुदाय -
प्रत्येक समुदाय की अपने रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ एवं मान्यताएँ होती है जो बालक को सामाजीकरण में सहायक होती है। समुदाय में मनाये जाने वाले तीज त्यौहार, उत्सव, एवं अन्य सामाजिक क्रियाओं में भाग लेकर बालक का सामाजीकरण होता है।
• उत्सव
विभिन्न उत्सव में सम्मलित होकर व्यक्ति में आपसी सहयोग, संस्कृति का ज्ञान होता है. जिससे उसका सामाजीकरण होता है।
• आर्थिक संस्थाएँ
आर्थिक संस्थाएँ व्यक्ति को विभिन्न व्यवसायिक संघो से सम्बन्धित करती है। इन संस्थाओं के द्वारा प्रतिस्पर्धा, सहयोग, सहकारिता, समायोजन आदि के सिद्धांतों को सीखकर समाज से अनुकूलन करना सरल हो जाता है। मार्क्स एवं वेबलेन के अनुसार, “आर्थिक संस्थाएँ ही व्यक्ति के जीवन व सामाजिक ढाँचे को निर्धारित करती है। आर्थिक जीवन की सफलता आज के युग में सामाजीकरण की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी समझी जाती है।"
• धार्मिक संस्थाएँ–
व्यक्ति के जीवन में धर्म का गहरा प्रभाव पड़ता है। धार्मिक संस्थाएँ व्यक्ति में पवित्रता, शांति, न्याय, सदचरित्रता नैतिकता जैसे गुणों का विकास करती है धार्मिक प्रवचन पाप पुण्य, स्वर्ग-नकर धारणा लोगों को सामाजिक प्रतिमानों के अनुरूप आचरण करना सिखाती है।
• राजनैतिक संस्थाएँ-
राजनैतिक संस्थाएँ व्यक्ति को कानून शासन अनुशासन से परिचित कराकर तथा व्यक्ति को उसके अधिकार एवं कर्तव्यों की जानकारी प्रदान करती है जिससे वह एक कुशल नागरिक बनना है।
• सांस्कृतिक संस्थाएँ -
सामाजीकरण की प्रक्रिया में सांस्कृतिक संस्थाएँ जैसे साहित्य आकदमी, नाटक-मण्डली, क्लब आदि के माध्यम से व्यक्ति अपनी संस्कृति प्रथाओं, परम्पराओं, साहित्य, कला आदि से जुड़ता है। जिससे उसके व्यक्तित्व का संतुलित विकास होता है।
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