सामाजिक क्रिया को समझने की विधि - method of understanding social action

 सामाजिक क्रिया को समझने की विधि - method of understanding social action


मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रियाओं को समझने के लिए कुछ विधियां बताई है इनके दो प्रकार होते हैं:


(1) बौद्धिक विधि (Rational Method)


(2) भावनात्मक विधि (Emotional Method)


1. बौद्धिक विधि ( Rational Method)


जैसा इसके नाम से ही स्पष्ट है इसमें हम सामाजिक क्रिया को बुद्धि के आधार पर या विवेकपूर्ण ढंग से समझने की कोशिश करते हैं। इसमें क्रिया के पीछे कर्ता के द्वारा लगाए जाने वाले अर्थ के आधार पर उस क्रिया की परिस्थिति लक्षणों और प्रभाव को समझने का प्रयास किया जाता है। क्रिया को बौद्धिक रूप से समझने के लिए मैक्स वेबर ने इसे दो भागों में बांटा है:


1. तार्किक विधि (Logical Method) - मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया को समझने के लिए जो पहली विधि बताई है वह तर्क आधारित है। इस विधि में तर्क के आधार पर सामाजिक क्रिया की प्रकृति उसके कारण और उसके परिणामों को तार्किक आधार पर समझने का प्रयास किया जाता है। मानव की अनेक क्रियाएं तर्क और विवेक पर आधारित होती हैं।

उदाहरण के तौर पर यदि जो विद्यार्थी दसवीं कक्षा के बाद जीव शास्त्र का अध्ययन करता है वही बाद में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले सकता है। यह तर्क आधारित है इस तरह से वाणिज्य या कला के विद्यार्थी को इंजीनियरिंग कॉलेज या मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जा सकता क्योंकि यह क्रिया तार्किक नहीं होगी।


2. गणित आश्रित विधि (Mathematical Method) समाज में घटित होने वाली कुछ क्रियाएं ऐसी होती हैं जिन्हें केवल गणित के माध्यम से ही समझा जा सकता है उदाहरण के तौर पर पांच और पांच दस ही होंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है और इसे किसी अन्य क्रिया के माध्यम से स्पष्ट नहीं किया जा सकता।


2. भावनात्मक विधि (Emotional Method) 


सामाजिक क्रिया को समझने की दूसरी विधि भावनात्मक है।

मनुष्य के द्वारा की जाने वाली क्रियाएं हमेशा तर्क एवं बुद्धि के द्वारा ही संचालित नहीं होती। कई बार उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य भावना प्रधान भी होते है इसलिए कुछ इस तरह के कार्यों को बौद्धिक रूप से ना समझ कर भावनाओं के माध्यम से समझ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बच्चे ने किसी दुकान से चोरी की है तो हमें उसके चोरी के कारणों को समझने के लिए उसकी भावना को समझना होगा हो सकता है। उस व्यक्ति ने चोरी अपनी भूख को मिटाने के लिए या अपने परिवार की परेशानी को मिटाने के लिए की हो। अतः हमारे लिए जानना अत्यंत आवश्यक है कि बालक ने चोरी क्यों की? भावनाओं के द्वारा सामाजिक क्रिया को समझने के लिए मैक्स वेबर ने दो विधियां बताई है


1. प्रत्यक्ष अवलोकन विधि (Direct Observation Method) सामाजिक क्रियाओं को भावनाओं के माध्यम से समझने की पहली विधि प्रत्यक्ष अवलोकन है। इसमें हम अवलोकन के माध्यम से सामाजिक क्रियाओं को बहुत आसानी से समझ सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति लगातार पढ़ाई में बहुत अधिक मेहनत कर रहा है तो उसको देख कर के हम अंदाज लगा सकते हैं कि उसकी पढ़ाई का प्रयोजन या उद्देश्य अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है।


2. व्याख्या विधि (Method Explanatory Method) समाज में बहुत सारी क्रियाएं ऐसी होती हैं। जिन्हें देखकर नहीं समझा जा सकता। इन क्रियाओं को समझने के लिए प्रत्यक्ष अवलोकन ही पर्याप्त नहीं होता, जब तक कि हमें उसके उद्देश्यों के बारे में पता ना हो। उदाहरण के तौर पर यदि हम किसी व्यक्ति को लकड़ी काटते हुए देखते हैं तो हमारे लिए यह समझना बहुत मुश्किल है कि वह लकड़ी किस लिए काट रहा है। अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए या अपनी जीविका के लिए इस तरह अवलोकन के आधार पर अवलोकन के उद्देश्यों के आधार पर ही हम यह स्पष्ट कर पाते हैं कि किसी भी परिस्थिति में व्यक्ति का विशिष्ट व्यवहार क्यों हो रहा है।


मैक्स वेबर के अनुसार सामाजिक क्रिया को समझने के लिए उसके अर्थ मूलक व्याख्या की आवश्यकता होती है इस अर्थ मूलक व्याख्या को दो भागों में बांट कर समझा जा सकता है:


1. औसत प्रकार की अर्थ मूलक व्याख्या

 2. विशुद्ध प्रकार की अर्थ मूलक व्याख्या


मैक्स वेबर का कहना था कि “सामाजिक क्रिया का अध्ययन हमें विशुद्ध अर्थ मूलक व्याख्या के द्वारा ही करना चाहिए और इसे समझने के लिए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण विधियों का उल्लेख भी किया जिससे कि समाज की अवधारणा को भली प्रकार समझा जा सके।" मैक्स वेबर ने तर्कपूर्ण व्याख्या और अर्थपूर्ण व्याख्या पर भी अधिक बल दिया। इस संबंध में मैक्स वेबर ने यह भी बताया कि सामाजिक क्रियाओं के कुछ निश्चित अर्थ होते हैं तथा एक प्रेरक शक्ति भी होती है। यह दोनों ही दूसरे व्यक्तियों की प्रेरक शक्तियों एवं क्रियाओं से बदलते रहते हैं। इसलिए यह बात अत्यंत महत्वपूर्ण है कि समाजशास्त्र किसी सामाजिक क्रिया की व्याख्या उसके अर्थ के आधार पर करता है, जो कि दूसरे की क्रियाओं द्वारा निर्देशित होता है। इसलिए समाजशास्त्र प्राकृतिक विज्ञानों से पूर्ण रूप से पृथक हो जाता है।