आधुनिक सामाजिक चिंतन - modern social thought

 आधुनिक सामाजिक चिंतन - modern social thought


भारत में आधुनिक चिंतन की शुरूवात अंग्रेजी शासन में 19वीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशको से होता है। औपनिवेशिक शासन काल में अंग्रेज़ अपने फायदे के लिए भारत में रेलवें, प्रेस, शिक्षा तथा पाश्चात्य सामाजिक मूल्यों का तेजी से प्रचार-प्रसार आरम्भ किया जिसका भारतीय समाज का व्यापक प्रभाव पड़ा। विशेष रूप से पाश्चात्य सामाजिक मूल्यों एवं शिक्षा का तत्कालीन भारतीय सामाजिक चिंतन जो धर्म, दर्शन, परंपरा, रूढ़िवादिता, पर आधारित थी। को झकझोर कर रख दिया। परिणाम स्वरूप भारतीय सामाजिक चिंतन में का दृष्टिकोण को विकास हुआ। जिसकी शुरूवात बंगाल के सामाजिक चिंतक और भारत के समाज सुधारक राजाराम मोहन राय से होती हैं।

उनका सामाजिक चिंतन तार्किता पर आधारित था इन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह, बहुपत्नी विवाह आदि जैसी सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। महिलाओ की स्थिति, महिला शिक्षा आदि के सम्बंध में रूढिवादी परंपराओं को समाप्त कर समाज को नई दिशा प्रदान किया।


इन्होने अपने विचार धारा के विकास एवं प्रचार प्रसार के लिए ब्रह्म समाज की स्थापना की । दयानन्द सरस्वती (1824-1883ई0) ने आर्य समाज की स्थापना की और वैदिक मूल्यों, परंपराओं को पुनः स्थापित करने पर बल दिया। इन्होंने भारतीय समाज में प्रचलित रूढिवादिता, अंधविश्वास, कर्मकांडो, पर कडा प्रहार किया। इसके अतिरिक्त ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानन्द, दादा भाई नौरोजी, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपतराय, एम. जी) रानाडे आदि जैसे सामाजिक विचारको भारत में बौद्धिक एवं तार्किक सामाजिक चिंतन को स्थापित करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया।


इस तरह से भारत में समाजशास्त्र के विकास का अनौपचारिक अध्ययन किया जाय तो वैदिक काल से लेकर आधुनिक काल तक सामाजिक चिंतन जो धर्म, दर्शन, परंपरा, कल्पना आदि से प्रभावित होने के कारण समाजशास्त्रीय अध्ययन तो नहीं कहा जा सकता परन्तु वैदिक काल, प्राचीन काल और आधुनिक काल में कई विचारकों द्वारा समाज का व्यवस्थित अध्ययन किया गया। जिनके सामाजिक अध्ययन में तार्किक सामाजिक मूल्यों की झलक दिखाई पड़ती है से भारत में समाजशास्त्रीय अध्ययन में प्रचुर मात्रा में सामग्री ली गयी इसलिए भारत में समाजशास्त्र के उद्भव एवं विकास को समझने से पहले समाजशास्त्र के इस अनौपचारिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक हो जाता था।