सामाजिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता - Need of Social Reconstruction

 सामाजिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता - Need of Social Reconstruction


कॉम्ट सामाजिक पुनर्निर्माण क्यों चाहते थे? उन्होंने उस समय की पुनर्निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की? कुछ निम्न कारणों के आधार पर हम यह स्पष्ट करने का प्रयास करेंगे कि पुनर्निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की गई


1. सामाजिक व्यवस्था एवं संगठन की दृष्टि से कॉम्ट का काल उत्तम नहीं था। उस काल में सामाजिक स्थिति ढुलमुल थी। सामाजिक नियम एवं मूल्य फीके पड़ गए थे।


2. कॉम्ट के समय में सामाजिक संगठन टूट गया था। अनेक सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो गई थी। संपूर्ण सामाजिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई थी। इन सब में बदलाव लाने के लिए कॉम्ट ने पुनर्निर्माण की आवश्यकता का अनुभव किया।


3. सामंतवादी व्यवस्था कमजोर पड़ गई थी, उसका स्थान पूंजीवादी व्यवस्था ग्रहण कर रही थी। मौलिक रूप से कॉम्ट पूंजीवाद के विरोधी नहीं थे परंतु उस युग में जिस तरह से पूंजीवाद पनप रहा था, वह कॉम्ट को पसंद नहीं था।


4. उस युग की आर्थिक व्यवस्था ने समाज को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित कर दिया था। सामंतवादी वर्ग, मध्यम वर्ग और श्रमिक वर्ग जिसे सर्वहारा वर्ग भी कहा जा सकता था।


5. पूंजीपति मशीन का उपयोग करके अपने उद्देश्यों और हितों को प्राप्त कर रहे थे। मशीन एवं तकनीकी का उपयोग श्रमिकों के हित में अथवा उनकी दशा को सुधारने के लिए नहीं हो रहा था। समाज के इस व्यवस्था से कॉम्ट काफी चिंतित थे।


6. उस समय जो लोग मध्यम वर्ग के थे, वे व्यापार में उद्योगों के माध्यम से धन कमाकर पूंजीपति बनते जा रहे थे। इन लोगों का उस समय मुख्य उद्देश्य केवल धन कमाना था।


7. पूंजीवादी शोषणकारी व्यवस्था से मुक्ति पाने के लिए कॉम्ट सामाजिक पुनर्निर्माण को आवश्यक मानते थे। 


8. कॉम्ट के अनुसार पूंजीवादी व्यवस्था भी लाभकारी हो सकती है। यदि उसे संचालित एवं नियंत्रित करने के लिए सामाजिक नीति बनाई जाए।


9. पूंजीवादी व्यवस्था पर नियंत्रण के अभाव में श्रमिकों का शोषण जारी रहेगा। इसलिए पूंजी का समुचित सदुपयोग करने की दृष्टि से सामाजिक पुनर्निर्माण आवश्यक है। 


10. कॉम्ट चाहते थे कि पूंजीपतियों में सामाजिक और औद्योगिक नैतिकता पनपे।


11. पूंजीपति पूंजी को समाज की धरोहर माने और उसका प्रयोग समाज कल्याण के लिए करें।


12. कॉम्ट का अनुभव था कि समाज में धार्मिक एवं नैतिक आचार व्यवस्था का अभाव है, यदि पूंजीपति श्रमिकों के प्रति स्नेह, प्रेम, न्याय, सहानुभूति एवं सहयोग की भावना से प्रेरित होकर समाज की उन्नति के लिए प्रयत्न करें तो एक आदर्श समाज की संरचना संभव है।


13. कॉम्ट नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करना चाहते थे। वे समाज में नैतिक नियमों का संगठन चाहते थे। उनके अनुसार नैतिक दृष्टि से सभी पूंजीपतियों को स्वयं पूंजी का स्वामी न मानकर सार्वजनिक संपत्ति का नैतिक रक्षक माना जाना चाहिए।


14. कॉम्ट जानते थे कि औद्योगीकरण के परिणाम स्वरुप वर्गों का निर्माण होगा और वर्ग संघर्ष होगा। कॉम्ट वर्ग संघर्ष पर नियंत्रण रखने के लिए सामाजिक पुनर्निर्माण चाहते थे।