सामाजीकरण के उद्देश्य ,विशेषताएँ - Objectives, Characteristics of Socialization

 सामाजीकरण के उद्देश्य ,विशेषताएँ - Objectives, Characteristics of Socialization


ब्रूम तथा सेल्जनिक ने सामाजीकरण के चार प्रमुख उद्देश्य बतलाये है जो इस प्रकार है –


1. नियमबद्धता का विकास - सामाजीकरण की प्रक्रिया व्यक्ति के जीवन को नियमबद्ध बनाये रखने के लिए आवश्यक है। सामाजीकरण से वह परिवार, विद्यालय एवं समाज के निमयों से परिचित होकर उनके अनुरूप चलता है जिससे समाज सुचारू रूप से चलता रहता है।


2. सामाजिक क्षमताओं का विकास सामाजीकरण से मनुष्य में सामाजिक क्षमताओं जैसे - सहयोग, त्याग, दया, आदि का विकास होता है जिससे समाज का वातावरण सौहार्द्ध पूर्ण बना रहता है।


3. आकांक्षाओं की पूर्ति - सामाजीकरण का उद्देश्य व्यक्ति में आकांक्षाओं को उत्पन्न करना है तथा उनको प्राप्त करने के लिए सहायता पहुँचाना है।


4. सामाजिक दायित्वों की पूर्ति का प्रशिक्षण सामाजीकरण से व्यक्ति विभिन्न प्रकार की सामाजिक भूमिका निभाने की योग्यता प्राप्त करता है। सामाजीकरण की प्रक्रिया से वह सीखता है कि विभिन्न परिस्थितियों में व्यक्ति अन्य लोगों से किस प्रकार सामंजस्य स्थापित करें।


सामाजीकरण की विशेषताएँ


1. सामाजीकरण जीवनपर्यन्त चने वाली प्रक्रिया है अर्थात् बालक के जन्म से लेकर मृत्यु तक सामाजीकरण की प्रक्रिया चलती रहती है।


2. सामाजीकरण सीखने की एक प्रक्रिया है परन्तु सभी प्रकार का सीखना सामाजीकरण नहीं हैं। समाज द्वारा मान्य व्यवहारों, मूल्यों एवं आदर्शों को सीखना सामाजीकरण कहलाता है।


3. सामाजीकरण की प्रक्रिया समय व स्थान के सापेक्ष होती है। यह समय व स्थान के साथ बदलती रहती है। इसी कारण विभिन्न समाजों में विभिन्न कालों में सामाजीकरण का ढंग भिन्न-भिन्न होता है।


4. सामाजीकरण की प्रक्रिया से व्यक्ति क ‘आत्म' का विकास होता है फिर इसी के द्वारा व्यक्ति का निर्माण होता है।


5. सामाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज की सांस्कृतिक विशेषतएँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तान्तरित होती रहती है। इस प्रकार हम कह सकते है कि सामाजीकरण सांस्कृति को आत्मसात करने की प्रक्रिया है।