धर्म के समाजशास्त्र का उद्देश्य - Objectives of Sociology of Religion

 धर्म के समाजशास्त्र का उद्देश्य - Objectives of Sociology of Religion


मैक्स वेबर की धर्म के समाजशास्त्र के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए सोरोकिन ने लिखा है कि मैक्स वेबर के धर्म के विवेचन का प्रमुख उद्देश्य धार्मिक और आर्थिक घटनाओं के बीच पाए जाने वाले संबंधों का विश्लेषण करना था। इसकी विवेचना मैक्स वेबर ने इतने विस्तृत रूप में कि है कि इस कार्य को मात्र धर्म का समाजशास्त्र न कहकर संपूर्ण संस्कृतियों का समाजशास्त्र कहा जा सकता है। इस संबंध में विभिन्न विद्वानों में मतभेद के बावजूद भी यह कहा जा सकता है कि वेबर का यह सिद्धांत वास्तविक भौतिक घटनाओं पर आधारित है। यही कारण है कि उसे विशिष्ट मूल प्रदान किया जाता हैं।"


धर्म और आर्थिक घटनाओं में क्या संबंध है इसके बारे में पारसंस ने लिखा है

"निस्संदेह मैक्स वेबर समस्त सामाजिक क्षेत्रों में एक असाधारण रूप से योग्य सामाजिक और आर्थिक इतिहासकार थे और इस कारण आप सरलता से अपने बाकी शैक्षणिक जीवन को एक महान ऐतिहासिक अध्ययन की पूर्ति में लगा सकते थे परंतु ऐसा करने के बजाए आप सर्वथा भिन्न अध्ययन क्षेत्र की ओर मुड़े और समस्त महान विश्व धर्मों के धार्मिक आचारों तथा उनसे संबंधित सामाजिक तथा आर्थिक संगठन के बीच पाए जाने वाले  विद्यमान संबंधों के विरुद्ध तुलनात्मक अध्ययन कार्य में जुड़ गए।”


मैक्स वेबर के तुलनात्मक अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य यह प्रमाणित करना था कि सामाजिक संरचना में समग्र रूप में कौन-कौन से तत्व समाज के लिए विशेष रूप से विशिष्ट और केंद्रीय महत्व के हैं। धर्म के समाजशास्त्र के अध्ययन का मैक्स वेबर का उद्देश्य धर्म और आर्थिक पहलुओं के बीच पाए जाने वाले पारस्परिक संबंधों को भी ज्ञात करना था। ऐतिहासिक उद्विकास की व्याख्या करते हुए कुछ विचारकों ने आर्थिक पक्ष को महत्वपूर्ण माना है जबकि इसके विपरीत कुछ धार्मिक पहलुओं पर अधिक जोर दिया है। मैक्स वेबर की मुख्य समस्या यह थी कि इन दोनों में से कोई भी पक्ष अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। दोनों एक दूसरे पर आश्रित है और इसे उन्होंने अपने सिद्धांत में प्रमाणित करने का प्रयास किया है।


ऐतिहासिक उद्गमों की समस्या को प्रस्तुत करने में मैक्स वेबर मार्क्सवादी दृष्टिकोणसे प्रभावित थे पर उन्होंने यह भी अनुभव किया कि मार्क्स कि इस व्याख्या की प्रणाली को विकास की प्रक्रिया पर लागू नहीं किया जा सकता।


मैक्स वेबर ने कार्ल मार्क्स के सामान आर्थिक कारक को सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण माना है परंतु उन्होंने यह स्वीकार करने से मना किया है कि आर्थिक कारक ही एकमात्र कारण है और साहित्य सामाजिक व राजनीतिक संरचना विज्ञान कला दर्शन और धर्म सब कुछ आर्थिक कारकों के द्वारा ही निश्चित होते हैं। मैक्स वेबर के अनुसार धार्मिक आचार और आर्थिक व्यवस्था एक दूसरे को प्रभावित करते हैं और कभी कभी आचारशास्त्र और नैतिक सिद्धांत या धारणाएं भी आर्थिक परिवर्तन का मार्ग दिखाती हैं। जुलियल फ्राइड के अनुसार "मैक्स वेबर ही वह सर्व प्रमुख विचारक थे जिन्होंने धर्म का अत्यधिक सूक्ष्म और वैज्ञानिक अध्ययन करके समाजशास्त्र में धर्म के समाजशास्त्र जैसी एक स्वतंत्र शाखा की स्थापना की है। " मैक्स वेबर के धर्म के इस सिद्धांत के पीछे जैसा कि पारसंस ने लिखा है गहरी पद्धति शास्त्रीय अंतष्टि है।

मैक्स वेबर का उद्देश्य ऐतिहासिक क्रम से सभी विशिष्ट तथ्यों का विश्लेषण तथा स्पष्टीकरण करना नहीं है बल्कि सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनीय तत्वों को निश्चित रूप से पृथक करना तथा परिवर्तनीय अवस्थाओं के अंतर्गत उन की क्रिया कार्य या प्रभाव का अध्ययन करके उसके उनके कार्य कारण महत्व को दर्शाना है। मैक्स वेबर ने अपने अध्ययन में धार्मिक कारक को एक परिवर्तनीय तत्व माना है और उसका आर्थिक तथा अन्य सामाजिक घटनाओं पर जो कार्य कारण प्रभाव पड़ता है। उसका विश्लेषण और निरूपण करने का प्रयास किया है। मैक्स वेबर के धर्म के समाजशास्त्र के अंतर्गत प्रतिपादित पद्धति शास्त्रीय उपागम तथा कार्य परिणाम की व्याख्या उनकी की एक नई सूझबूझ थी इसके कारण मैक्स वेबर को धर्म के समाजशास्त्र का जनक भी कहा जाता है।