समाजशास्त्र की उत्पत्ति एवं विकास - Origin and Development of Sociology

समाजशास्त्र की उत्पत्ति एवं विकास - Origin and Development of Sociology

समाज शास्त्र मूल रूप से सामाजिक संबंधों और सामाजिक ढांचे का अध्ययन करने वाला विज्ञान है इस अर्थ में इसके आधुनिक स्वरूप का इतिहास भले ही अधिक पुराना न हो लेकिन इस मूल रूप का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। 


पश्चिमी समाजों में समाजशास्त्र


समाज शास्त्र के विकास की प्रथम अवस्था पश्चिमी समाज के क्रमबद्ध और सुनिश्चित अध्ययन में प्रथम स्थान यूनानी विचारको का है। आज से लगभग काफी वर्ष पहले सामाजिक संबंधों का सूक्ष्म अध्ययन किया था। प्लेटों ने अपनी पुस्तक रिपब्लिक और अरस्तू को पोल्टिक्स ने अनेक सामाजिक घटनाओं, प्रथाओं, स्त्रिओं की स्थिति, पारिवारिक संबंधों तथा सामाजिक संहिताओं का वर्णन किया था। इन विज्ञानों के विचारों में स्पष्टता का आभाव अवश्य था ये एक ओर समाज, समुदाय तथा राज्य में और दूसरी ओर दर्शन एवं विज्ञान में भेद नहीं कर पायें। इस समय समाज में धर्म और जादू टोने का विशेष प्रभाव था इसलिए उस समय सामजिक घटनाओं का अध्ययन मुख्यतः वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नहीं किया जा सका। 


समाजशास्त्र के विकास की द्वितीय अवस्था


छठी शताब्दी से चौदहवी शताब्दी तक का काल समाज शास्त्र के विकास की द्वितीय अवस्था मानी जाती है इस काल में कॉफी लम्बे समय तक सामाजिक समस्याओं को समझने के लिए धर्म और दर्शन का सहारा लिया जाता रहा है। तेरहवी शताब्दी के उत्तरार्ध में सामाजिक घटनाओ को समझने में तर्क को भी स्थान दिया जाने लगा इसी काल में समाज को परिवर्तनशील माना जाने लगा और साथ ही इस परिवर्तन के पीछे कुछ निश्चित नियम, सामजिक क्रियाओं एवं शक्तियां कार्य करती है। 


समाजशास्त्र के विकास की तृतीय अवस्था


इस अवस्था का प्रारम्भ पन्द्रहवी शताब्दी से माना जाता है। इसी समय हाब्स, लाक तथा रूसों के द्वारा प्रतिपादित सामाजिक समझौते का सिद्धान्त आया। 17 वीं शताब्दी में जेम्स हेरिगटन का नाम प्रमुख रहा है। जिन्होंने इतिहास की आर्थिक व्याख्या से सम्बन्धित एक व्यवस्थित सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। 


समाजशास्त्र के विकास की चतुर्थ अवस्था


19 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अधिकांश अर्थशास्त्रियों, दार्शिनिकों और इतिहास वेत्ताओं ने आर्थिक परिस्थियों पर ही सम्पूर्ण ध्यान केन्द्रित करके सामाजिक समस्याओं का अध्ययन किया। इन विद्वानों में एडम मूलर, मॉडरर, अरनाल्ड हसलर, न्युमन, स्टर्न फील्ड, रोसर, हिल्डे ब्रान्ड, लीप्ले का नाम प्रमुख है। आगस्त कॉम्ट ने 1838 में समाजशास्त्र शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया।