अमेरिका में समाजशास्त्र का उद्भव - The Origin of Sociology in America

अमेरिका में समाजशास्त्र का उद्भव - The Origin of Sociology in America

समाजशास्त्र का विकास 19वीं सदी में उभरती आधुनिकता की चुनौतियों जैसे औद्योगिकरण, शहरीकरण व वैज्ञानिक पुनर्गठन की शैक्षणिक अनुक्रिया के में हुआ। यूरोपीय महाद्वीप में इस विषय ने अपना प्रभुत्व जमाया व वही ब्रिटिश मानव शास्त्र ने सामान्यतया एक अलग पथ का अनुसरण किया। 20वीं सदी के समाप्त होने तक कई प्रमुख समाजशास्त्रीयों ने ऐग्लो अमेरिकन दुनिया में रह कर काम किया। ऐसे अग्रणी समाजशास्त्रीय में समनर, वार्ड, गिडिग्स, स्माल, रॉस, कोजर, सोरोकिन पारसन्स, कूले आदि के नाम उल्लेखनीय है।


वास्तव में अमेरिका में उत्पन्न कई पारिस्थितिकीय आन्दोलनों ने सामाजिक दृष्टिकोण की शुरूआत की। समाजशास्त्रीयों के अनुसार ब्रिटिश उपनिवेश में दासता उन्मूलन के लिए लोगों की समाजिक अंतर्दृष्टि ही जिम्मेदार थी। इस समय एक आधुनिक समाजशास्त्री पिनल ने मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति के इलाज में पारम्परिक तरीकों के स्थान पर मानवीय तरीकों का प्रयोग किया। समाजशास्त्रीय बेकारिया ने भी अपराधी व्यक्ति के इलाज के पारम्परिक तरीकों व परिणामों का अध्ययन कर अन्य तरीकों का सुझाव दिया।


इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट है कि उपर्युक्त सभी समाजशास्त्री ने सामाजिक समस्याओं के अध्ययन में सामाजिक दृष्टिकोण अपनाया साथ ही पारम्परिक दृष्टिकोण व नीतियों व परिणामों को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया।


अमेरिका के येल विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम समनर के नेतृत्व में 1876 में समाजशास्त्र अध्ययन की शुरूआत हुयी। 1890 में इस विषय को वर्तमान नाम से केन्सास विश्वविद्यालय लारेंस में पढ़ाया गया जिसका शीर्षक 'समाजशास्त्र के तत्व' था। पहली बार फ्रैक ब्लैकमर द्वारा पढ़ाया गया। अमेरिका में जारी रहने वाला यह सबसे पुराना पाठ्यक्रम है। तत्पश्चात् अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय में 1892 में ए0डब्ल्यू स्माल के नेत्त्व में समाजशास्त्र विषय का अध्ययन शुरू हुआ स्माल ने ही 1895 में अमेरिकन जर्नल आफ सोशियोलॉजी की स्थापना की यही से समाजशास्त्र विचारधारा संबंधी शिकागो सम्प्रदाय की उत्पत्ती होती है जिसका उल्लेख हम आगे करेंगे। विषय विकास क्रम में कनाडा के मेक गिल विश्वविद्यालय में 1980 में, कैलिफोर्निया के बर्कले विश्वविद्यालय में 1950 में व प्रिस्टन विश्वविद्यालय में 1960 में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना की गयी।


शिकागो स्कूल


अमेरिका में सर्वप्रथम सन् 1892 में शिकागों विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना हुई इस विभाग द्वारा अध्ययन अध्यापन एवं शोध की जो परंपरा विकसित हुई वही कालान्तर में समाजशास्त्रीय जगत में शिकागों सम्प्रदाय के नाम से सुप्रसिद्ध हुई। शिकागों सम्प्रदाय ने विशेषतया नगरीय समस्याओं (अपराध, अपचार, गरीबी आदि) के अध्ययन की ओर ध्यान दिया तथा अध्ययन पद्धति के रूप में परिस्थितिकीय व नृविज्ञानीय विधियों का प्रयोग कर शोध अध्ययनों को नया आयाम दिया बाद में इसी सम्प्रदाय के मूल विचारों के आधार पर अन्तर्क्रियावादी परिप्रेक्ष्य का विकास हुआ।


इस सम्प्रदाय के संस्थापक एल्बिन स्मॉल रहे। इस सम्प्रदाय के अनुयायियों में ई0डब्लू बर्गेस, जे०एच०मीड, रॉडरिक मैकेन्जी, पार्क, डब्ल्यू आई थॉमस, लुई वर्थ एवं एफ नैनकी का नाम उल्लेखनीय है सन् 1895 में इस सम्प्रदाय द्वारा समाजशास्त्र की प्रथम पत्रिका अमेरिकन जर्नल ऑफ सोशियोलॉजी का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया सन् 1905 में अमेरिकी समाजशास्त्रीय परिषद की स्थापना की गई।


शिकागों सम्प्रदाय की प्रमुख विशेषता दार्शनिक व्यवहारिकता है जो घटनाओं के प्रत्यक्ष अवलोकन व नगरीय सामाजिक प्रक्रियाओं के विश्लेषण पर जोर देता है इस सम्प्रदाय ने समाजशास्त्र के क्षेत्र कार्य व आनुभविक अध्ययनों की न केवल ठोस आधारशिला रखी अपितु समाजशास्त्र में इसे अध्ययन अनुसंधान की एक प्रमुख पद्धति के रूप में स्थापित किया। राबर्ट पार्क का यह कथन इस तथ्य की पुष्टि करता है। उन्होंने अपने विद्यार्थियों से कहा कि “जाओ और विलासितापूर्ण होटलों के बरामदों और घर पर मकानों की सीढ़ियों पर बैठो, गोल्ट कोस्ट की बेचों और गंदी बस्तियों के बिस्तरों पर बैठो, नृत्य संगीत घरो व मदिरालयो में बैठो संक्षेप में हर कहीं जाओ और वास्तविक शोध हेतु अपनी पेन्टो की बैठके खराब करो। इसी निर्देश के फलस्वरूप अनेक प्रतिष्ठित आनुभविक अध्ययनों की शुरूआत हुई। उनमें से प्रमुख हैं फ्रेडरिक थ्रेसर की द गैंग (1927), क्लिफोर्ड शॉ की द जैक रोलर (1930), नेल्स एण्डरसन की दोबो (1923) व हार्वे ज़ोरबाघ की "द गोल्ड कोस्ट एण्ड द स्लम'। इन अध्ययनों द्वारा सहभागिक अवलोकन व वैयक्तिक अध्ययन विधि में काफी संशोधन व परिमार्जन किया गया।


शिकागो परंपरा ने न केवल गुणात्मक शोध अपितु परिमाणात्मक शोध में भी अपनी विशिष्टता प्रदर्शित की है अनेक सामाजिक सर्वेक्षणों व समुदाय आधारित सांख्यिकीय शोध व सामाजिक क्षेत्रों के संख्यात्मक निर्धारण द्वारा इस तथ्य की पुष्टि होती है। यही नहीं ई.सी. ह्यूजेज़ के नेतृत्व में इस परंपरा में सैद्धान्कि शोध के क्षेत्र में भी काफी काम हुआ ह्यूजेज़ ने व्यवसायों व पेशों के समाजशास्त्र के क्षेत्र में कार्य कर कुछ सैद्धान्कि प्रस्थापनाएं प्रस्तुत की है।


इस प्रकार शिकागो सम्प्रदाय ने जहां एक ओर अनुभविक समाजशास्त्र को एक सुस्पष्ट स्वरूप व कलेवर प्रदान किया वहीं दूसरी ओर इसे सामाजिक मनोविज्ञान के एक विशिष्ट स्वरूप के उद्भव का श्रेय भी जाता है। जार्ज हरबर्ट मीड के नेतृत्व में सामाजिक अन्तर्क्रिया जिस प्रकार व्यक्तिगत पहचान व स्व को विकसित एवं प्रभावित करती है। इस संबंध में मीड व बाद में हरबर्ट ब्लूमर ने सामाजिक अन्तर्क्रियावाद के सिद्धांत को विकसित किया।