कॉम्ट के समाजशास्त्र का भाग - part of Comte's sociology
कॉम्ट के समाजशास्त्र का भाग - part of Comte's sociology
अगस्त कॉम्ट ने समाजशास्त्र को एक व्यापक शास्त्र के रूप में स्वीकार किया है। कॉम्ट ने समाजशास्त्र को सामाजिक व्यवस्था तथा प्रगति का विज्ञान मानते हुए समाजशास्त्र को दो भागों में बांटा है -
1. सामाजिक स्थिति विज्ञान ( Social Statics)
2. सामाजिक गति विज्ञान (Social Dynamics)
कॉम्ट अपने दार्शनिक विचारों के आधार पर बताया है कि सामाजिक घटनाओं के दो स्वरूप स्थिर और गतिशील होते हैं अतः समाजशास्त्र को इन दोनों भागों का अध्ययन करना चाहिए।
सामाजिक स्थिति विज्ञान (Social Static)
सामाजिक स्थिति विज्ञान का संबंध समाज की वर्तमान अवस्था एवं व्यवस्था से है। समाजशास्त्र के इस विभाग के अंतर्गत समाज के वर्तमान नियमों का अध्ययन किया जाता है।
यह देखा जाता है कि वर्तमान सामाजिक नियम कैसा प्रभाव डाल रहे हैं। वर्तमान सामाजिक संगठन का अध्ययन एवं मूल्यांकन भी सामाजिक स्थिति विज्ञान द्वारा ही होता है। सामाजिक स्थिति विज्ञान वर्तमान समाज में व्याप्त सामाजिक घटनाओं के अस्तित्व संबंधी रूप का भी अध्ययन करता है।
सामाजिक स्थिति विज्ञान समाजशास्त्र की वह शाखा है, जो समाज का पूर्ण विभाग के रूप में अध्ययन करती है। दूसरे शब्दों में सामाजिक व्यवस्था है। संरचना के अंतर्गत अनेक भाग होते हैं। सामाजिक स्थिति विज्ञान इन समस्त भागों का अलग-अलग ही नहीं बल्कि एक संपूर्ण व्यवस्था के रूप में भी अध्ययन करता है। यह सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न भागों की क्रिया और प्रतिक्रियाओं के नियमों को भी खोजने का प्रयत्न करता है। सामाजिक स्थिति विज्ञान समाज रूपी शरीर के विभिन्न भागों में परस्पर समायोजन उत्पन्न करने वाले सामान्य नियमों की खोज करता है। सामाजिक स्थिति विज्ञान में समाज की उन घटनाओं का अध्ययन किया जाता है जो स्थिर होती हैं।
परिभाषाएं ( Definition )
एम.डब्ल्यू. वाइन के अनुसार सामाजिक स्थिति विज्ञान समाजशास्त्र की वह शाखा है जो संपूर्णता के रूप में कार्य करने वाले समाज के विभिन्न भागों का अध्ययन करती है।”
ई.एस.बोगार्डस के अनुसार “सामाजिक स्थिति विज्ञान सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न भागों के क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं के नियमों का अध्ययन है।" उपर्युक्त परिभाषा से निष्कर्ष निकलता है कि सामाजिक स्थितिशास्त्र समाजशास्त्र की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था और सामाजिक ढांचे का अध्ययन किया जाता है। साथ ही इस ढांचे में जो भी क्रिया और प्रतिक्रिया होती है उसका अध्ययन भी इसके अंतर्गत किया जाता है। सामाजिक स्थिति विज्ञान में समाज के विभिन्न भागों में सामंजस्य स्थापित करने वाले तत्वों का भी अध्ययन किया जाता है। इन भागों में पाई जाने वाली शारीरिक एकमतता को ढूंढने का प्रयास किया जाता हैं। इस एकमत्ता को तीन रूपों में स्वीकार किया गया है- भौतिक, बौद्धिक और नैतिका इससे समाज में स्थिरता उत्पन्न होती है और यही स्थिति सामाजिक व्यवस्था का आधार है।
अगस्त कॉम्ट ने स्थिति विज्ञान के अंतर्गत तीन तत्वों को सम्मिलित किया है
1. व्यक्ति (Individuals) व्यक्ति परिवार में जन्म लेता है और व्यक्तियों के योग से ही परिवार का निर्माण होता है। इस प्रकार समाज में व्यक्ति का स्थान केंद्र में है।
2. परिवार (Family) - परिवार समाज की मौलिक इकाई है। व्यक्ति के बाद परिवार का स्थान दूसरा है। परिवार से ही समाज का निर्माण होता है। परिवार के विकास के आधार पर ही समाज का विकास होता है। परिवार की उत्पत्ति और विकास की मौलिक इकाई परिवार ही है। समाजशास्त्र के अंतर्गत परिवार का अध्ययन किया जाता है। अगस्त कॉम्ट ने परिवार के अंतर्गत दो तत्वों को सम्मिलित किया है
A. यौन संबंध (Sex Relations)
B. माता-पिता के संबंध (Parental Relations)
3. समाज (Society) सामाजिक स्थिति विज्ञान में व्यक्ति और परिवार के बाद समाज का स्थान आता है। समाज परिवारों का योग है। समाज के अंतर्गत भी निम्न तत्वों का अध्ययन किया जाता। सामाजिक स्थिति विज्ञान में व्यक्ति और परिवार के बाद समाज का स्थान आता है। समाज के अंतर्गत भी निम्न तत्वों का अध्ययन किया जाता है.
A. प्रारंभिक अधीनता
B. सरकार के द्वारा सत्य सिद्धांत का आधार
C. सुविधाएं
D. समाज की सरकार के प्रति प्रवृत्ति
E. सेवाओं का वितरण
उपरोक्त आधार पर हम कह सकते हैं कि एक समाज व्यवस्था के लिए समाज के विभिन्न अंगों में एकमतता होना आवश्यक है। समाज विभिन्न अंगों से बनी एक शारीरिक संरचना के समान है। जिसमें संतुलन रहना आवश्यक है। इस संतुलन को हम तभी प्राप्त कर सकते हैं जब संपूर्ण समाज के साथ उसके विभिन्न अंगों में परस्पर समायोजन हो। एकमतता सामाजिक व्यवस्था में स्थिरता एवं स्थायित्व उत्पन्न करता है अर्थात सामाजिक स्थिति विज्ञान उन नियमों की खोज करता है जो सामाजिक स्थिरता की दशाओं को उत्पन्न करते हैं।
कॉम्ट का यह विश्वास है कि वह ऐसे युग में रह रहे हैं जहाँ सामाजिक संतुलन अत्याधिक बिगड़ा हुआ है। इस कारण सामाजिक स्थिति विज्ञान का एक कर्तव्य है कि वह उन अवस्थाओं का भी अध्ययन करें जो सामाजिक संतुलन की पुनर्स्थापना के लिए आवश्यक है। इस प्रकार सामाजिक स्थिति विज्ञान किसी एक समय तथा स्थान में पाए जाने वाले एकमतता के अध्ययन तक ही सीमित नहीं है। सामाजिक सावयव के लिए उचित मौलिक एकमत से भी संबंधित है। इसमे सभी समाजों का भूत और वर्तमान के लौकिक एकमत का अध्ययन किया जाता है।
सामाजिक स्थिति विज्ञान की सार्थकता यह है कि यह विज्ञान सामाजिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों से हमारा परिचय करवाता है। जिससे कि हम इसके महत्व को समझ सके और अपने सामाजिक जीवन को इस प्रकार से संगठित करें जिससे कि सामाजिक संतुलन बिगड़ न पाए और मानव के भौतिक, नैतिक और बौद्धिक तीनों पक्षों का संतुलित विकास हो।
कॉम्ट मध्य युग के कैथोलिक धर्म द्वारा स्थापित एकमतता से बहुत प्रभावित थे। उनका विश्वास था से कि उस धर्म ने संगीत कला विज्ञान और उद्योग को एक महान धार्मिक व्यवस्था में समायोजित कर दिया था। इस प्रकार एक संगठन के लिए नैतिक आधार भी प्रस्तुत किया। इसलिए कॉम्ट का विश्वास था कि धर्म में सामाजिक पुनर्निर्माण के अत्यंत प्रभावशाली एवं बलशाली तत्वों छिपे हुए हैं। जिसका उपयोग करके उससे लाभ उठाया जा सकता है। कॉम्ट का कहना है कि इन्हीं प्रभावशाली तत्वों के कारण ही धर्म बिना किसी रक्तपात के विदेशों में धार्मिक साम्राज्य स्थापित करने में सफल रहा। कैथोलिक धर्म ने अध्यात्म तथा अलौकिक शक्ति के बीच स्पष्ट भेद किया है और इस प्रकार ईसाई धर्म की सार्वभौमिक नैतिकता को लौकिक क्षेत्र से ऊपर बताया है। इस प्रकार इस धर्म ने ऐसे तत्व को समाज में बलशाली बताया जिसका आदर दास और राजा दोनों करते हैं। इस प्रकार मध्यकालीन कैथोलिक धर्म उच्च स्तर के एक मत का उदाहरण प्रस्तुत करता है। कॉम्ट का मत है कि वह इस प्रकार की व्यवस्थाओं का विश्लेषण करें और उसमें निहित शक्तिशाली स्रोतों का पता लगाए।
कॉम्ट का विश्वास है कि एकमतता के सिद्धांत सदा एक जैसे ही होते हैं चाहे सामाजिक व्यवस्था की प्रकृति धार्मिक हो तात्विक या प्रत्यक्ष ।
सामाजिक गति विज्ञान (Social Dynamics)
सामाजिक गति विज्ञान मानव के विकास या प्रगति का अध्ययन है। यह मानवता की आवश्यक तथा निरंतर गति का विज्ञान है। सामाजिक गति विज्ञान के अंतर्गत वे निश्चित नियम आते हैं जिनके अनुसार समाज का क्रमिक विकास हुआ है और सामाजिक परिवर्तन होता है। कॉम्ट का कहना है कि यह प्रमाणित करना सरल है कि समाज का क्रमिक परिवर्तन सदैव एक ही दिशा में या एक निश्चित क्रम से हुआ है। यह क्रम निरपेक्ष तो नहीं है फिर भी कुछ समानताएं तथा आवश्यक अनुक्रम को तो ढूंढा जा सकता है। सामाजिक गति विज्ञान के अंतर्गत इन सभी का अध्ययन किया जाता है। कॉम्ट सामाजिक परिवर्तन को एक निरंतर प्रक्रिया मानते हैं। सामाजिक गति विज्ञान, मानव किन-किन अवस्थाओं से गुजर कर वर्तमान अवस्था तक पहुंचा है, केवल इसका ही अध्ययन नहीं करता बल्कि वह सामाजिक भविष्य को बताने का प्रयास भी करता है। कॉम्ट का कहना है कि मानव समाज एक निश्चित क्रम के आधार पर ही प्रगति करता है।
कॉम्ट के अनुसार “प्रगति व्यवस्था ही है और व्यवस्था के मूर्त रूप को ही प्रगति समझा जाता है।” सामाजिक प्रगति को आवश्यक मानते हुए कॉम्ट ने कहा है कि मानव तो सामाजिक प्रगति में केवल एक साधन मात्र है। सामाजिक व्यवस्था के नियमों की खोज करना समाजशास्त्र का कार्य है।
कॉम्ट के अनुसार सामाजिक गति विज्ञान ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। सामाजिक गति विज्ञान इतिहास से अपने तथ्यों का संकलन करता है। इसीलिए इसे इतिहास का विज्ञान भी कहा गया है। यह सामाजिक घटनाओं की उत्पत्तिओं के विषय में अध्ययन इतिहास से प्रारंभ करता है न की तात्विक विचारों से। सामाजिक गति विज्ञान केवल भूत या वर्तमान का अध्ययन करके ही नहीं रुक जाता बल्कि समाज में व्यक्ति की वर्तमान अवस्था पहले की अवस्था का परिणाम है। भविष्य वर्तमान से संचालित होता है का भी अध्ययन करता है। इस तरह सामाजिक गति विज्ञान का आशय है, परस्पर संबंधित सामाजिक तथ्यों की क्रमिक अवस्था में परिवर्तन का विश्लेषण करना।
कॉम्ट ने यह दावा किया कि सामाजिक गति विज्ञान यह प्रमाणित करता है कि
A. मृत सदैव जीवित पर शासन करते हैं
B. मनुष्य उत्तरोत्तर धार्मिक होता जा रहा है
सामाजिक स्थिति विज्ञान और सामाजिक गति विज्ञान कॉम्ट के उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि कॉम्ट का समाजशास्त्र सामाजिक व्यवस्था और सामाजिक परिवर्तन के अध्ययन का विज्ञान है।
वार्तालाप में शामिल हों