सामाजीकरण की प्रक्रिया - The process of socialization
सामाजीकरण की प्रक्रिया - The process of socialization
सामाजीकरण की प्रक्रिया एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति का विकास सामाजिक संस्थाओं के अनुकूल होता है परन्तु व्यक्ति को अपने आपको भी इसके लिए तैयार करना होता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति में दो प्रकार से परिवर्तन आते है पहला उसका विभिन्न व्यक्तियों के सम्पर्क में आने से होने वाली अन्त:क्रियाओं दूसरा उसके अन्दर होने वाली अन्त:क्रिया विभिन्न व्यक्तियों के मध्य होने वाली क्रियाओं से व्यक्ति उचित व्यवहार करने के नियम कायदें सीखता है। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि वह समाज का एक स्वीकृत सदस्य बने इसके लिए जरूरी है कि उसका व्यवहार समाज के अनुकूल हो। इस स्तर पर व्यक्ति चार प्रक्रियाओं द्वारा सीखता है -
1. प्रतिस्पर्धा 2. सहयोग 3. संघर्ष 4. सामजस्य सामाजीकरण की प्रक्रिया में व्यक्ति के अन्दर होने वाली अन्त: क्रिया की अपन महत्व है चूँकि व्यक्ति जब तक स्वयं समाज के अनुकूल व्यवहार करने के लिए प्रेरित नहीं होगा अन्य कोई भी व्यक्ति उसे ऐसा करने के लिए बाह्य नहीं कर सकता है। इसके अन्तर्गत निम्न तीन प्रक्रियाएं आता है।
1. सात्मीकरण 2. आत्मीकरण 3. अनुकरण
सामाजीकरण प्रक्रिया के मुख्य कारक
सामाजिक प्रक्रिया के मुख्य कारक निम्नलिखित हैं
• पालन पोषण (Child Rearing)
सामाजीकरण के लिए यह आवश्यक है कि बालक का पालन पोषण उचित ढंग से किया जाये। ऐसा होने पर ही वह समाज के मूल्यों एवं आदर्शों के अनुसार आचरण करना सीखता है।
• सहानुभूति ( Sympathy)
पालन पोषण की भाँति सहानुभूति का भी बालक के सामाजीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शिशु अवस्था में बालक अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिवार पर निर्भर रहता है। बालक की आश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ उसके साथ सहानुभूति की आवश्यकता भी होती है। सहानुभूति के द्वारा बालक में अपतत्व की भावना विकसित होती है। जिसके परिणाम स्वरूप वह भेदभाव करना सीख जाता है। वह उन लोगों को ज्यादा प्यार करने लगता है जिनका व्यवहार उसके प्रति सहानुभूति पूर्वक होता है।
• सहयोग (Co-operation)
समाज व्यक्ति को सामाजिक बनाता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि समाज के सहयोग की भावना व्यक्ति को सामाजिक बनाती है।
जैसे-जैसे व्यक्तित को समाज से सहयोग प्राप्त होता है वैसे-वैसे वह भी समाज को सहयोग प्रदान करने लगता है। जैसे बीमारी में या दुर्घटना के समय समाज के लोग उसे सहयोग देते हैं तो वह भी आस-पड़ोस में कोई घटना घटने पर वहाँ सहयोग करता है। इससे उसकी सामाजिक प्रवृत्तियाँ संगठित हो जाती है।
• निर्देश (Suggestion) -
सामाजिक निर्देशों एवं सुझावों का व्यक्ति के सामाजीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। समाज में व्यक्ति कोई कार्य करने से पहले समाज के लोगों से निर्देश या सुझाव देने पर वह कोई कार्य करता है। इस प्रकार हम देखते है कि निर्देश या सुझाव सामाजिक व्यवहार की दिशा का निर्धारित करते है।
• अनुसरण या अनुकरण (Imitation)
अनुकरण का बालक पर गहरा प्रभाव पड़ता है वह परिवार में माता-पिता, भाई-बहिन या अन्य सदस्यों को जैसा व्यवहार करते देखता है उसी का अनुकरण वह करने लगता है इसी प्रकार वह समाज में आस-पास के लोगों के व्यवहार भी अनुकरण करता है अर्थात् वर परिवार एवं समाज के लोग जिस प्रकार का व्यवहार करते है उसकी नकल करता है और समाज के अनुरूप बनने की कोशिश करता है। इस प्रकार हम कह सकते है कि अनुकरण समाजीकरण का आधारभूत तत्व है।
• आत्मीयता या आत्मीकरण (Identification)-
माता-पिता परिवार तथा आस-पड़ोस के लोगों के प्रेमपूर्ण व्यवहार एवं सहनुभूति से बालक में आत्मीयता की भावना पैदा होती है।
जो व्यक्ति उससे प्यार करते है सहयोग करते है तथा सहनुभूति रखते हैं वह उन्हें अपना समझने लगता है और वह उनके व्यवहार आचरण रहन-सहन बोल-चाल आदर्शों को अपनाने लगता है । इस प्रकार उसके व्यवहार में परिवर्तन आता है।
• पुरस्कार एवं दण्ड
बालक के सामाजीकरण में पुरस्कार एवं दण्ड का महत्वपूर्ण स्थान है। जब बालक समाज आदर्शों एवं मान्यताओं के अनुसार व्यवहार करता है तो समाज में उसकी प्रशंसा होती है या पुरस्कार मिलता है और यदि वह इनके विपरीत कार्य करता है तो उसकी निंदा की जाती हैं दण्ड दिया जाता है। इस कारण से वह अपने ऐसे कार्यों को त्याग देता है जिनके करने से उसे दण्ड या निंदा मिले और वह समाज के अनुरूप कार्य करना सीख जाता है।
वार्तालाप में शामिल हों