समाजशास्त्र के उद्भव के कारण - Reasons for the emergence of sociology
समाजशास्त्र के उद्भव के कारण - Reasons for the emergence of sociology
समाजशास्त्र के उद्भव के चार कारण है:
(I) आर्थिकः- औद्योगिक क्रान्ति जो 17-18वीं सदियों में हुयी थी इसने इस तथ्य को जन्म दिया कि 19वी सदी की शुरूआत अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में बाजार संबंधों के अनुमोदन से हुयी थी। सामंतवाद के युग में विभिन्न वर्गों के बीच आर्थिक संबंधों का आधार गैर आर्थिक निर्भरता था जिसका एक उदाहरण भूमि मालिक व कृषक के बीच संबंधों के रूप में सेवा कर सकता है। बाजार संबंधों में सभी प्रतिभागी बराबर होते हैं।
(2) राजनीतिक:- 19वीं सदी की शुरूआत उस समय हुई जब संविधान के आधार पर सरकार के लोकतात्रिक रूप की स्थापना न्व पश्चिमी यूरोप के राज्यों में की जाती है 19वीं सदी के मध्य में आम संसदीय चुनाव का आयोजन किया जाता है इसके अतिरिक्त विभिन्न राजनीतिक आन्दोलनों के साथ ही पार्टियों का गठन भी होता है समाज के सदस्यों को समान अधिकार दिये जाते है पूर्व नागरिक बनाये जाते हैं।
(3) वैज्ञानिक संज्ञानात्मक: सामाजिक विचारों का विकास कई शताब्दियों के लिए किया जाता है। जो कि एक नए विज्ञान के उद्भव की रूपरेखा का निर्माण करते हैं प्राचीन व मध्यकाल में बेकन, साइमन, रूसों, क्वेटलेट आदि अनेक समाजशास्त्र अग्रदूतों के सामाजिक विचारों ने समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण हेतु पृष्ठभूमि प्रदान की।
(4) सामाजिक:- अमेरिका का पश्चिमी यूरोप में नागरिक समाज के उभरने के लिए आर्थिक बौद्धिक व राजनीतिक कारणों का वर्णन किया गया। नतीजतन नई सामाजिक प्रक्रिया उभरी, लोगों की सामाजिक व भौगोलिक गतिशीलता में वृद्धि हुयी और सामाजिक संरचना बदलना शुरू हुयी। इन परिवर्तनों का वर्णन करने हेतु एक नये वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता थी।
उपर्युक्त कारकों ने सामजशास्त्र के उद्भव में उत्प्रेरक का कार्य किया और एक विषय के रूप में समाजशास्त्र 1838 में फ्रांस में उद्भूत हुआ। लेकिन भले ही समाजशास्त्र का जन्म यूरोप की धरती पर हुआ हो लेकिन इसको उर्वरता अमेरिका की जमीन ने दी। अतः जन्म के 38 वर्ष उपरान्त सन् 1876 में अमेरिका के ऐल विश्वविद्यालय में ग्राहन समनर के नेतृत्व में अध्ययन की शुरूआत हो जाती है इसलिए समनर को समाजशास्त्र विषय का अकादमिक जनक भी कहा जाता है। 1890 में पहली बार इस विषय को इसके नाम के तहत अमेरिका के केन्सास विश्वविद्यालय में पढ़ाया गया जिसका शीर्षक 'समाजशास्त्र के तत्व' था। इस प्रकार समनर के अतिरिक्त अमेरिका में समाजशास्त्र के विकास में बार्नस, टानकॉट पारसन्स, कोजर, रॉस, मैकाइबर, सोरोकिन ऑगबर्न, निमकॉफ गिडिग्स मर्टन पार्क वर्गेस आदि विद्वानों का योगदान उल्लेखनीय है जिनपर चर्चा इस ईकाइ के विषय विस्तार खण्ड में करेगें।
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