संस्कृति और सभ्यता में संबंध - relationship between culture and civilization
संस्कृति और सभ्यता में संबंध - relationship between culture and civilization
मैकाइवर द्वारा उल्लेखित उपरोक्त अन्तरों से प्रथम दृष्टया यह ज्ञात होता है कि सभ्यता और संस्कृति एक दूसरे के विपरीत है उनमें किसी भी प्रकार का कोई समन्वय नहीं है। लेकिन सभ्यता और संस्कृति मानव जीवन के पूरक अंग हैं ये जितना एक दूसरे के विपरीत दिखते हैं उतना ही एक दूसरे से सम्बन्धित भी हैं और एक दूसरे को पूर्णता भी प्रदान करते हैं। इस प्रकार सभ्यता और संस्कृति में निम्नलिखित संबंध दृष्टिगत होते हैं
1. संस्कृति और सभ्यता अन्योयाश्रित है- संस्कृति एवं सभ्यता भले ही एक दूसरे से पृथक हैं लेकिन वे एक दूसरे से विलग होकर जीवित नहीं रह सकते दोनों केवल अन्योयाश्रित नहीं है अपितु अन्तर क्रियाशील भी हैं। सभ्यता की वस्तुएं जिन्हें Artifacts कहते हैं, सांस्कृतिक वस्तुओं Mentifacts से प्रभावित होती हैं
तथा संस्कृति सभ्यता की दृष्टियों से प्रभावित होती हैं मनुष्य केवल किसी वस्तु को ही प्राप्त नहीं करना चाहता बल्कि सबसे सुन्दर वस्तु को प्राप्त करना चाहता है। यहाँ पर संस्कृति सभ्यता को प्रभावित करती है। मोटर गाड़ी तथा रेडियों एक उपयोगी वस्तु हो सकती है परन्तु इसका माडल या रंग संस्कृति द्वारा निर्धारित होता है।
2. सभ्यता और संस्कृति दोनों परस्पर प्रभावशाली है-सभ्यता एवं संस्कृति न केवल अन्योयाश्रित अपितु अन्तरक्रियात्मक भी हैं संस्कृति प्रौद्योगिक विकास के स्तर के प्रति अनुक्रिया करती है इस प्रकार साहित्य कला का स्वरूप मुद्रण यंत्र के विकास से अत्यधिक प्रभावित हुआ है। चलचित्र के अविर्भाव से पूर्व नाटकीय प्रदर्शन मंहगे होते हैं जिन्हें केवल धनी लोग ही देखते थे। लेकिन आज असंख्य लोग सुदूर स्थानों पर बैठे इन प्रदर्शन का आनन्द लेते हैं।
संचरण के साधनों के विकास ने अभिव्यक्ति के ढंगों पर गहन प्रभाव डाला है। सभ्यता संस्कृति का वाहन है, भूतकाल की अपेक्षा आज जबकि प्रौद्योगिकी उन्नति तीव्र गति से हो रही है यह प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता है। हमारी विचारधारा, कला, नैतिकता सभ्यता द्वारा रूपान्तरित और अपसरित हो रही है।
3. संस्कृति सभ्यता को भी प्रभावित करती है सभ्यता युग की शैलियों, मानदण्डों एवं विचारधारा से प्रभावित हुये बिना नहीं रह सकती, संस्कृति की अपनी निरन्तरता रहती है इन्हें तोड़ना कठिन है दोनों के बीच संघर्ष में संस्कृति सभ्यता पर विजयी हो जाती है। सांस्कृतिक मूल्यांकनों में किसी परिवर्तन का प्रभाव समूह की संस्थागत संरचनाओं पर पड़ता है। अन्य शब्दों में कहे तो सभ्यता समाज की चालक शक्ति है जबकि संस्कृति दिशा वाहक।
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