व्यक्ति और समाज के संबंध - Relationships between Man & Society
व्यक्ति और समाज के संबंध - Relationships between Man & Society
व्यक्ति और समाज परस्पर रूप से संबंधित होते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और मनुष्यों से ही समाज का निर्माण होता है मानव समाज के बिना अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकता। समाज के बिना व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है क्योंकि समाज में रहकर ही व्यक्ति सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्राणी के रूप में विकसित होता है। इस तरह हम कह सकते हैं कि जहां एक तरफ व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समाज पर निर्भर है वहीं दूसरी तरफ समाज का अस्तित्व भी व्यक्तियों के बिना संभव नहीं है। जब हम मानव जीवन का विश्लेषण करते हैं तो हमें इस विश्लेषण के दो आधार देखने को मिलते हैं।
1. प्राणीशास्त्रीय आधार
2. सामाजिक आधार
इन्हीं आधारों के समन्वय से मनुष्य सामाजिक प्राणी बनता है। सामाजिक शब्द सामाजिक आधार और प्राणी शब्द प्राणीशास्त्रीय आधार का परिचायक है। व्यक्ति जब जन्म लेता है
तो वह केवल प्राणीशास्त्री प्राणी होता है। वंशानुक्रम से उसे कुछ मानसिक और शारीरिक विशेषताएं प्राप्त होती हैं परंतु उसे एक सामाजिक प्राणी के रूप में विकसित करने में समाज का योगदान सर्वाधिक होता है।
अतः हम कह सकते हैं कि सामाजिक विकास का आधार समाज ही है। हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण है जिसमे हमने पाया कि प्राणीशास्त्री गुण रहने के बाद भी यदि मनुष्य समाज के संपर्क में नहीं रहता है तो वह मनुष्य नहीं बन पाता है। उसका सामाजिक विकास नहीं हो सकता लेकिन यहां पर यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि समाज भी किसी सामाजिक प्राणी का विकास तब तक नहीं कर सकता जब तक कि उसे प्राणीशास्त्री रूप में मानव प्राप्त न हो। अर्थात सामाजिक प्राणी का निर्माण कोई चमत्कार नहीं है अपितु व्यक्ति और समाज के परस्पर समन्वय से ही प्राणीशास्त्रीय प्राणी सामाजिक प्राणी बनता है। इसलिए व्यक्ति और समाज दोनों की महत्वपूर्ण हैं, दोनों एक दूसरे पर आधारित हैं, दोनों एक दूसरे के पूरक है।
कई शताब्दियों से अनेक लेखकों ने मनुष्य और समाज के संबंध में अनेक उपागमों एवं दृष्टिकोणों का प्रतिपादन किया। मनुष्य और समाज के बीच में पाए जाने वाले संबंधों को समझने के लिए आवश्यक है, कि हम इन दृष्टिकोण को समझें और उससे परिचित हो जाएं
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