सामाजिक प्रकारों या समाज के वर्गीकरण के नियम - Rules for the clarification of Social Type
सामाजिक प्रकारों या समाज के वर्गीकरण के नियम - Rules for the clarification of Social Type
दुर्खीम के अनुसार दुनिया भर के समाज विभिन्नताओं से परिपूर्ण हैं। सामाजिक तथ्य चाहे सामान्य हो या असामान्य समाज के संदर्भ में सापेक्षिक हैं। क्योंकि एक तथ्य एक समाज के लिए सामान्य हो सकता है जबकि वही तथ्य दूसरे समाज के लिए असामान्य हो सकता है क्योंकि दुर्खीम के अनुसार दुनियाभर के समाज सभी विभिन्नता से परिपूर्ण हैं। दुर्खीम ने समाजशास्त्रीय पद्धति के नियमों के माध्यम से समाज के वर्गीकरण को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। दुर्खीम ने चार प्रकार के समाजों का उल्लेख किया है
1. सरल समाज (Simple Societies)
2. सरल बहु व्रत खंडीय समाज (Simple Polysegmental Societies)
3. सरल रूप से मिश्रित बहु व्रत खंडीय समाज (Polysegmental Societies Simple Compound)
4. दोहरी रूप से मिश्रित बहुखंडीय समाज (Polysegmental Societies Doubly Compound)
समाजशास्त्र में समाज के वर्गीकरण के अनेक प्रयास किए गए हैं। इसलिए दुर्खीम के इस वर्गीकरण को समाजशास्त्र के विकास के संदर्भ में देखना चाहिए। दुर्खीम के वर्गीकरण का आधार अगस्त कॉम्ट, हरबर्ट स्पेंसर तथा कार्ल मार्क्स के वर्गीकरण से मिलता जुलता है। क्योंकि इनसब ने सामाजिक उद्विकास के चरणों को ही सामाजिक वर्गीकरण का आधार माना वर्गीकरणों की श्रेणियों में सरलता से जटिलता की तरफ बढ़ने की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
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