सामाजिक तथ्यों की व्याख्या के नियम - Rules for the Explanation of Social Facts
सामाजिक तथ्यों की व्याख्या के नियम - Rules for the Explanation of Social Facts
दुखम के अनुसार सामाजिक तथ्यों की व्याख्या उनके प्रकार एवं कारणों के आधार पर ही की जा सकती है। जिससे उनकी उत्पत्ति हुई है। दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों की व्याख्या के लिए कुछ नियम बनाए हैं
1. दुर्खीम के अनुसार जब किसी सामाजिक घटना की व्याख्या की जाती है तो उसके उत्पन्न होने के कारण एवं उसके प्रकारों को अलग-अलग ढूंढना चाहिए।
2. सामाजिक तथ्य को निर्धारित करने वाले कारणों को पहले वाले सामाजिक तथ्यों में ढूंढना चाहिए न की व्यक्तिगत चेतना की अवस्था में।
3. सामाजिक तथ्य का कार्य सामाजिक उद्देश्य के संबंध में ही होना चाहिए।
4. सामाजिक क्रियाओं की प्रथम उत्पत्ति समूह के आंतरिक रचना में खोजी जानी चाहिए।
इस प्रकार दुर्खीम सामाजिक तथ्यों की व्याख्या के नियमों को निर्धारित करते हैं तथा समाजशास्त्रियों को इन नियमों के द्वारा सचेत करते हैं कि सामाजिक तथ्यों की मनोवैज्ञानिक व्याख्या से बचना चाहिए।
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