सामाजिक तथ्यों के अवलोकन के नियम - Rules for the Observation of Social Fact
सामाजिक तथ्यों के अवलोकन के नियम - Rules for the Observation of Social Fact
दुर्खीम ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड (The Rules of Sociological Method) के अध्याय दो में सामाजिक तथ्यों के अवलोकन के नियमों की व्याख्या की है। सामाजिक तथ्यों का वैज्ञानिक अवलोकन तभी संभव है। जब हम निष्पक्ष एवं तटस्थ रहकर सामाजिक तथ्यों का अवलोकन करें। सामाजिक तथ्यों के अवलोकन से संबंधित जो भ्रांतियां पहले से ही समाज में प्रचलित रही हैं। दुर्खीम ने हमारा ध्यान उस ओर आकर्षित किया है। दुर्खीम का कहना है कि सामाजिक तथ्यों के अवलोकन के रूप में प्रायः विद्वान विचारों से वस्तुओं की ओर बढ़ने का प्रयास करते हैं। जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता और ऐसे अध्ययन वस्तुनिष्ठ नहीं हो सकते।
दुर्खीम ने यह भी बताया है कि सामाजिक तथ्यों के अवलोकन में एक गलत पद्धति का प्रयोग विभिन्न विज्ञानों में किया जा रहा है। इनमें समाजशास्त्र भी शामिल है।
दुर्खीम सामाजिक तथ्यों का यहां तक की संवेगों और मनोभावों को वैज्ञानिक पद्धति से देखना चाहते थे। उनके अनुसार सामाजिक तथ्य मनोवैज्ञानिक होते हैं और इनकी उत्पत्ति सामाजिक यथार्थता से होती है। इसी कारण ए तथ्य सामाजिक तथ्य हैं। दुर्खीम ने समाजशास्त्री पद्धति के कुछ नियम निर्धारित किए हैं और यह सामाजिक तथ्यों के अवलोकन से संबंधित हैं। यह नियम इस प्रकार हैं।
1. सामाजिक तथ्यों को वस्तुओं की तरह देखना चाहिए (Consider Social Facts as Things)
2. सभी पूर्वाग्रहों का उन्मूलन करना चाहिए (All Pre&Conception Must be Eradicated)
3. अध्ययन की विषय सामग्री को परिभाषित करना चाहिए (Define the Subject matter of Study)
4. सामाजिक तथ्यों को व्यक्तिगत प्रगटीकरणों से पृथक करके अध्ययन करना चाहिए (Social Facts Should be Studied Independent of their Individual Manifestations)
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