सामाजिक स्तरीकरण का महत्व एवं कार्य - Significance and Functions of Social Stratification
सामाजिक स्तरीकरण का महत्व एवं कार्य - Significance and Functions of Social Stratification
सामाजिक स्तरीकरण ऊंच-नीच स्थिति समूहों में बांटने की एक व्यवस्था है। इसे ऊपरी तौर पर देखने से प्रतीत होता है कि इस व्यवस्था के द्वारा समाज विभिन्न स्तरों में बैठ जाता है और उनमें ऊंच-नीच की भावना जागृत होती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि इस व्यवस्था के द्वारा अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का होता है जो उसके महत्व को दर्शाता भी है। अतः सामाजिक स्तरीकरण के महत्त्व को निम्नलिखित रूप में देखा जा सकता है.
1. आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक
व्यक्ति की अनेक आवश्यकताएं होती हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी आवश्यकता ओं की पूर्ति स्वयं नहीं कर सकता। सामाजिक स्तरीकरण की व्यवस्था के द्वारा व्यक्तियों के कार्यों का विभाजन होता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने निश्चित कार्य को कुशलता से करके लोगों की आवश्यकता की पूर्ति में सहायक होता है।
2 प्रस्थिति का निर्धारण
सामाजिक स्तरीकरण का एक महत्व यह भी है कि के द्वारा व्यक्तियों को समाज में उचित स्थान मिलता है जिसे उस व्यक्ति की प्रस्थिति भी कही जाती है। समाज में हर एक व्यक्ति की योग्यता ता कार्यकुशलता समान नहीं होती। एक स्वस्थ समाज के लिए अवश्यक है कि की योग्यता के अनुसार परिस्थिति प्राप्त हो। इस आवश्यकता की पूर्ति सामाजिक स्तरीकरण द्वारा होती है।
3. कार्य को सरल बनाना सामाजिक स्तरीकरण की व्यवस्था के अंतर्गत व्यक्ति की योग्यता का निर्धारण हो जाता है। जैसे जाति व्यवस्था के द्वारा एक खास जाति को खास योग्यता व कार्य प्राप्त जिसे उसे पूरा करना होता है। उसी तरह वर्ग व्यवस्था के अंतर्गत एक खास वर्ग की खास योग्यता कार्यशैली होती है जिसे उसे पूरा करना होता है। इस तरह सामाजिक स्तरीकरण के माध्यम से व्यक्ति को जानकारी मिल जाती है. कि कौन सा कार्य करना है। इससे कार्यों में सरलता होती है।
4. सामाजिक एकीकरण में सहायक अजीत स्तरीकरण की व्यवस्था क्यों तथा समूह को विभिन्न वर्गों में बांट देती है। प्रत्येक वर्ग के व्यक्तियों के कार्य निश्चित होते हैं। एक व्यक्ति अपने कार्यों को पूरा कर अन्य कार्यों के संदर्भ में दूसरे पर निर्भर होता है। क्योंकि एक व्यक्ति की आवश्यकताएं केवल उसी के द्वारा पूरी नहीं हो सकती। इससे व्यक्तियों व समूहों में आपस में पारस्परिक निर्भरता बनी रहती है। यह निर्भरता सामाजिक एकीकरण में सहायक होता है।
5. सामाजिक प्रगति में सहायक सामाजिक स्तरीकरण प्रगति में सहायक होता है। व्यवस्था का आधार चाहे जन्म हो (जाति व्यवस्था) या योग्यता (वर्ग व्यवस्था) दोनों ही व्यक्ति में अपने ढंग से सामाजिक मान्यता के अनुसार कार्य करने की प्रेरणा देता है। जाति व्यवस्था के अंतर्गत आरती धर्म की बात कही जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार, व्यक्ति के पिछले जन्म के कार्यों के आधार पर इस जन्म के कर्म निर्धारित हुए हैं, अतः उनका पालन अनिवार्य है।
फलस्वरूप व्यक्ति स्वेच्छा से अपने कर्म को निभाता है। फिर वर्ग व्यवस्था में अधिक से अधिक योग्यता बढ़ाने का प्रयास करता है ताकि वह उस स्थिति को प्राप्त कर सके। यह दोनों ही स्थितियां सामाजिक प्रगति में सहायक होती हैं।
6. सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में सहायक सामाजिक स्तरीकरण का एक महत्व यह है कि वह समाज में व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होता है। इसके द्वारा जन्म व योग्यता के आधार पर मुझको विभिन्न वर्गों में बांट दिया जाता है तथा प्रत्येक वर्ग के व्यक्तियों के व्यवहार व ढंग निश्चित होते हैं। साथ ही ऐसी व्यवस्था कर दी जाती है व्यक्ति अपने निश्चित कार्यशैली को अपनाएं। इससे सामाजिक व्यवस्था बनी रहती है।
इस प्रकार उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट होता है कि सामाजिक स्तरीकरण व्यक्ति व समूह दोनों ही स्तर पर अपने महत्व को दर्शाता है।
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