सामाजिक तथ्य वस्तुतः कार्य करने, सोचने और अनुभव करने के तरीके हैं - Social Fact are Ways of Acting, Thinking and Feeling
सामाजिक तथ्य वस्तुतः कार्य करने, सोचने और अनुभव करने के तरीके हैं - Social Fact are Ways of Acting, Thinking and Feeling
दुर्खीम ने अपनी पुस्तक के पहले अध्याय में ही सामाजिक तथ्यों की व्याख्या करते हुए लिखा है कि सामाजिक तथ्य काम करने, सोचने और अनुभव करने की विधि है। उन्हीं के अनुसार सामाजिक तथ्य कार्य करने, सोचने और अनुभव करने के तरीके हैं। सामाजिक तथ्य व्यक्ति को संपूर्ण रूप से अपनी पकड़ में ले लेता है। यह पकड़ इतनी प्रबल होती है कि यदि कोई व्यक्ति अपने मस्तिष्क में कुछ सोचता है तो उसकी सोच पर भी सामाजिक तथ्य का दबाव होता है। जब व्यक्ति किसी क्रियाओं को नहीं करता है तो उसमें भी सामाजिक तथ्य की अभिव्यक्ति होती है। सामाजिक तथ्य का प्रभाव व्यक्ति पर इतना अधिक होता है कि उसकी संपूर्ण अनुभूति भी सामाजिक तथ्यों के परिवेश में आ जाती है।
वार्तालाप में शामिल हों