सामाजिक तथ्यों को व्यक्तिगत प्रगटीकरण से पृथक करके देखना चाहिए - Social facts should be seen separately from personal disclosure

 सामाजिक तथ्यों को व्यक्तिगत प्रगटीकरण से पृथक करके देखना चाहिए - Social facts should be seen separately from personal disclosure


व्यक्तिगत अभिरुचियों को सामाजिक तथ्य नहीं समझा जा सकता क्योंकि यह व्यक्तिगत होते हैं। दुर्खीम का कथन है कि जो वस्तु है, वह हर तरह से निजी होती है, उन्हें छोड़ देना चाहिए क्योंकि बाहरी विशेषताएं केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति होती है और दुर्खीम व्यक्तिवाद के घोर विरोधी थे। दुर्खीम के शब्दों में यह नियम जब समाजशास्त्री सामाजिक तथ्यों के किसी व्यवस्था को अनुसंधान के लिए स्वीकार करें तो उसका यह प्रयास होना चाहिए कि वह उन पर एक ऐसे पहलू से भी विचार करें जो कि उनकी वैयक्तिक अभिव्यक्तियों से स्वतंत्र हो।" इस नियम के अनुसार समाजशास्त्री को सामाजिक तथ्यों को व्यक्तिगत अभिव्यक्ति से अलग करके अध्ययन करना चाहिए क्योंकि इसके बिना अध्ययन में वस्तुनिष्ठता नहीं आएगी।