दुर्खीम का समाजशास्त्र को योगदान - Sociological Contributions of Emile Durkheim

दुर्खीम का समाजशास्त्र को योगदान - Sociological Contributions of Emile Durkheim


सामाजिक विचारकों की श्रेणी में दुर्खीम का नाम काफी लोकप्रिय है। कॉम्ट समाजशास्त्र के जन्मदाता माने जाते हैं जिन्होंने समाजशास्त्र का नामकरण किया, किंतु दुर्खीम समाजशास्त्र को एक पृथक विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित किया है। दुर्खीम को समाजशास्त्र में कॉम्ट का उत्तराधिकारी माना जाता है। दुर्खीम ने अनेक नवीन अवधारणा एवं सिद्धांत प्रस्तुत करके समाजशास्त्री जगत में अपने आपको ही प्रतिष्ठित नहीं किया है, बल्कि समाजशास्त्र को भी अन्य विज्ञानों की तुलना में उच्च स्थान प्रदान किया है। दुर्खीम ने महत्वपूर्ण समाजशास्त्रीय ग्रंथों की रचना की इन ग्रंथों ने समाजशास्त्री साहित्य के भंडार को बहुत अधिक समृद्ध किया है हम यहां पर समाजशास्त्र को दुर्खीम के द्वारा दिए गए योगदान को समझने का प्रयास करेंगे.


 पद्धतिशास्त्र (Methodology)


समाज में श्रम विभाजन का सिद्धांत (Theory of The Devision of Labour in Society) 


• सामाजिक विकास का सिद्धांत (Theory of The Development of Society)


• सामाजिक तथ्य का सिद्धांत (Theory of Social Fact) • आत्महत्या का सिद्धांत (Theory of Suicide)


• धर्म का सिद्धांत (Theory of Religion )


• ज्ञान का समाजशास्त्र (Sociology of Knowledge)


• मूल्यों का सिद्धांत (Theory of Values)


• नैतिकता का सिद्धांत (Theory of Morality)


• सामूहिक चेतना की अवधारणा (Concept of Collective Consciousness)


सामूहिक प्रतिनिधित्व की अवधारणा (Concept of Social Collective Representation )


• सामाजिक एकता की अवधारणा (Concept of Social Solidarity)


• आदर्श हीनता की अवधारणा (Concept of Anomie)


• अपराध दंड एवं कानून की अवधारणा


• प्रकार्यवाद की अवधारणा (Concept of Function)