समाजशास्त्र तथा राजनीति शास्त्र - Sociology and Political Science
समाजशास्त्र तथा राजनीति शास्त्र - Sociology and Political Science
समाजशास्त्र तथा राजनीति शास्त्र का आपस में बहुत ही घनिष्ट संबंध है। समाजशास्त्र के अन्तर्गत सामाजिक सम्बन्धो तथा व्यवस्थाय का अध्ययन किया जाता है। वही राजनीति शास्त्र सामाजिक प्राणियों में सामाजिक व्यवहार करने के सुव्यवस्थित तरीके तथा जागरूक स्थिति में मनुष्य के अधिकार तथा कर्तव्य से परिचित भी कराता है। तथा समय, परिस्थिति एवं आवश्यकतानुसार समाज में धर्म, कानून, परम्परा तथा प्रचार के द्वारा कैसे परिवर्तन होना चाहिए इस बिन्दु पर विचार भी राज्य तथा सरकारे करती है जिससे सामाजिक व्यवस्था सुदृढ तथा मजबूत होती है।
सभी सामाजिक विज्ञान एक दूसरे के पूरक है। उपर्युक्त प्रथम इकाई से लेकर चतुर्थ इकाई तक अगर हम मूल्यांकन करे तो कुछ मौलिक अंतर होते हुए भी सभी सामाजिक विज्ञान समाजशास्त्र से किसी न किसी रूप में कुछ लेने और कुछ देने के बीच सम्बन्धित है। यही कारण है समाजशास्त्र तथा अन्य सामाजिक विज्ञानो द्वारा सम्मिलित रूप में अनेक सामाजिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े होने के कारण सभी समाजिक विज्ञान एक दूसरे के पूरक है। समाज एक जटिल के समग्रता है। जिसके सभी पक्षों को एक विज्ञान द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सकता है। समाजशास्त्र और अन्य सामाजिक विज्ञान प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सामजिक दर्शन से प्रभावित है। सभी सामाजिक विज्ञानों की अध्ययन वस्तु सामाजिक ज्ञान है चाहे वह किसी पक्ष से सम्बन्धित क्यो न हो।
इतना जरूर है कि सभी सामाजिक विज्ञानों में समाजशास्त्र की स्थिति मुख्य है। इसका मुख्य कारण यह है कि समाजशास्त्र ही एक मात्र ऐसा विज्ञान है जो सम्पूर्ण समाज का सामान्य चित्र प्रस्तुत करता है। जबकि दूसरे सामाजिक विज्ञान समाज के एक छोटे से भाग अध्ययन में लगे है।
पक्षपात रूप से तथ्यों से की व्याख्या करना नही है। बल्कि सभी सामाजिक विज्ञानों को एक दूसरे के समीप लाना है। यही कारण है कि सभी सामाजिक विज्ञान एक दूसरे से पृथक होते हुए भी सामाजिक ज्ञान के से विकास में उसी प्रकार सहायक होते है जिस प्रकार श्रम विभाजन द्वारा विभिन्न कार्यों को अलग-अलग पद्धतियों से करने पर भी सभी व्यक्तियों का उद्देश्य किसी एक वस्तु का निर्माण करना ही होता है। इसी सन्दर्भ में भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति राधा कृष्णन ने भी कहा है कि समाजशास्त्र व विशेष सामाजिक विज्ञानो का जिसमें अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, सामजिक मानव शास्त्र तथा सामाजिक मनोविज्ञान प्रमुख है। एक ही परिवार का सदस्य माना जाना चाहिए।
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