अरूण्टा जनजाति का अध्ययन - Study of the Arunta Tribe

 अरूण्टा जनजाति का अध्ययन - Study of the Arunta Tribe


दुर्खीम ने धर्म के सिद्धांत की पुष्टि के लिए ऑस्ट्रेलिया की अरुण्टा जनजाति का अध्ययन प्रस्तुत किया इनका कहना है कि जनजाति लोगों के जीवन का अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि धार्मिक अनुभव एक प्रकार की सामूहिक उत्तेजना के कारण होता है। त्योहारों एवं उत्सव पर जनजाति के लोग एक साथ बैठते हैं, प्रत्येक व्यक्ति ऐसा अनुभव करता है कि सामूहिक शक्ति व्यक्तिगत शक्ति से कहीं अधिक होती है। इससे एक नवीन चेतना या उत्तेजना का निर्माण होता है। इस सामूहिक शक्ति के सामने प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य रूप से झुकना पड़ता है। व्यक्ति समूह की शक्ति के सामने झुकता है।

इस तरह से प्रभावित होकर उसके मन में समूह के प्रति भय, श्रद्धा एवं भक्ति की भावना पनपती है। वह समूह को साधारण से श्रेष्ठ या महान समझने लगता है, वास्तविकता यह है कि यह समूह या समाज ही धार्मिक पूजा का प्रतीक हो जाता है।


दुखम अरुण्टा का जनजातियों के अध्ययन के आधार पर यह बताया कि यहां विशिष्ट संस्कारों के समय लकड़ी या पत्थर के टुकड़ों के कुछ औजारों का प्रयोग किया जाता हैं। इन पर समूह के टोटम का निशान खुदा रहता हैं। इन औजारों को चरिन्गा कहा जाता है। चरिन्गा की प्रकृति पवित्र मानी जाती हैं।