भारत में समाजशास्त्र विषय का अध्ययन - Study of Sociology Subject in India
भारत में समाजशास्त्र विषय का अध्ययन - Study of Sociology Subject in India
भारत में समाजशास्त्र विषय का अध्ययन सबसे पहले अर्थशास्त्र विभाग के अन्तर्गत ही प्रारम्भ किया गया बाद में अर्थशास्त्र तथा समाजशास्त्र दोनों का अध्ययन अलग-2 विभाग के अन्तर्गत किया जाने लगा। लेकिन अर्थशास्त्र का समाजशास्त्र से संबंध बहुत गहरा है क्यो कि बिना धन के किसी भी समाज के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती तथा विकास धर्म, संस्कृति तथा मूल्य को लेकर आगे बढ़े इसके लिए संस्कृति युक्त समाज का होना अति आवश्यक है। इसलिए यहाँ अर्थशास्त्र की विषय सामग्री पर संक्षेप में चर्चा की गयी है क्यों कि उत्पादन उपभोग विनियम ये समाजशास्त्र की प्रकृति पर निर्भर करता है तथा कार्यों का वितरण समाज की शिक्षा, कला एवं विभिन्न क्षेत्रों में निपुणता को देखकर किया जाता है। राजस्व समाज को आवश्यकतानुसार आर्थिक सहायता, सार्वजनिक ऋण तथा सार्वजनिक आय का सही दिशा में व्यय करके समाज को आर्थिक रूप मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करता है। अतः समाज के लिए अर्थ भी नितान्त आवश्यक है।
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