आत्मावाद का सिद्धांत -Theory of Animism
आत्मावाद का सिद्धांत -Theory of Animism
इस सिद्धांत के प्रतिपादक एडवर्ड टायलर (Tylor) हैं। ये धर्म की उत्पत्ति के लिए आत्मा को ही उत्तरदायी मानते हैं। टायलर के इस सिद्धांत का समर्थक हरबर्ट स्पेंसर ने भी किया है। इस सिद्धांत के अनुसार धार्मिक जीवन के प्रारंभिक प्रकार का पता आत्मवादी विश्वासों एवं क्रियाओं द्वारा लगाया जाता है। इसमें निम्न तीन बातें शामिल होती हैं
1. आत्मा का विचार
2. आत्मा की पूजा एवं प्रेतात्मा में परिवर्तन
3. पूजा का धर्म में परिवर्तन पर बल दिया जाना
इस सिद्धांत के अनुसार आत्मा का विचार मनुष्य के दोहरे जीवन की कल्पना यानी जागृत और सुप्त दो अवस्थाओं के दृश्यों के विषय में भ्रामक ज्ञान से उत्पन्न हुआ है। एक वह जीवन जब व्यक्ति जाग रहा होता है तथा एक वह जिसमें वह सो रहा होता है। आदिम मनुष्य सपने दिखाई देने वाले दृश्यों को जागृत अवस्था में दिखाई देने वाले तथ्यों के समान ही सत्य और महत्वपूर्ण समझता है। अतः इस समय व्यक्ति को यह अनुभव होने लगा कि व्यक्ति के शरीर में दो आत्मा है। एक तो सोते समय शयन स्थान पर रहती है और एक शरीर को छोड़कर बाहर विचरण करती है। शरीर से पृथक और स्वतंत्र विचरण करने वाली आत्मा ही प्रेतात्मा बन जाती है। आदिम समाज में व्यक्ति प्रत्येक घटना की व्याख्या इन सिद्धांतों के आधार पर करता था। इस विचारधारा ने मृत्यु तथा स्वप्न में भी आत्मा की भावना को विकसित करने में मदद की। इस तरह शरीर आत्मा (Body Soul) तथा स्वतंत्र आत्मा (Free Soul) की अवधारणा विकसित हुई एवं पितरों की पूजा प्रारंभ हुई। जिसने आगे चलकर धर्म का रूप धारण कर लिया।
इससे प्राचीन समय में मनुष्य में स्वतंत्र सूक्ष्म शरीर अर्थात आत्मा का एहसास हुआ इतना ही नहीं बल्कि मृत व्यक्ति भी जिनका अंतिम संस्कार उनके परिवार के सदस्यों ने स्वयं किया है भी उनके स्वप्न में आ जाते हैं। इस तथ्य ने आत्मा संबंधित उपरोक्त एहसास की पुष्टि कर दी थी।
दुर्खीम ने इस सिद्धांत की आलोचना की, आत्मावाद के सिद्धांत में आत्मा को शरीर से पृथक अस्तित्व तंत्र अस्तित्व प्रदान किया गया है। दुर्खीम के अनुसार आत्मा की धारणा आदिम नहीं है। स्वप्न में दिखाई देने वाली दृश्यों को हम दोहरी आत्मा के विचार के लिए उत्तरदायी नहीं मान सकते। हम अधिकतर सपनों में उन्हीं दृश्यों को देखते हैं जो हमारे पिछले जीवन से संबंधित होते हैं। दुर्खीम लिखते हैं कि एक स्वच्छंद द्वितीय गति आत्मा के विचार तथा पूजा के योग्य पूर्व आत्मा के विचार के बीच एक तार्किक तथा मनोवैज्ञानिक खाई है।
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