सामाजिक क्रिया का सिद्धांत - Theory of Social Action

 सामाजिक क्रिया का सिद्धांत - Theory of Social Action


सामाजिक क्रिया के सिद्धांत के प्रतिपादकों में मैक्स वेबर का नाम अत्यंत प्रतिष्ठा के साथ लिया जाता है। इन्होंने सामाजिक क्रिया के सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की है। मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया के सिद्धांत के द्वारा ही समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति को स्पष्ट किया है। मैक्स वेबर की पीढ़ी के विचारकों के सामने बहुत बड़ी चुनौती समाजशास्त्र को परिभाषित करने की थी। रेमण्ड एरन (Raymond Aron) का कहना है कि "मैक्स वेबर ने समाजशास्त्र को सामाजिक क्रिया का एक विस्तृत विज्ञान कहकर उन सभी समाजशास्त्रियों से एक अलग दृष्टिकोण अपनाया है, जो कहते थे कि समाजशास्त्र को मुख्यतः सामाजिक संरचना के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।"


मैक्स वेबर की समस्या अपने सामाजिक क्रिया के सिद्धांत में तार्किकता को पर्याप्त स्थान देने की थी, तो दूसरी ओर वे व्यक्तिनिष्ठता को भी सामाजिक क्रिया के विश्लेषण में स्थान देना चाहते थे। इसी संदर्भ में उन्होंने समाजशास्त्र की परिभाषा देते हुए लिखा था कि सामाजिक क्रिया का अध्ययन ही समाजशास्त्र है।" मैक्स वेबर की इसी प्रयास का विश्लेषण करते हुए रैमण्ड एरन (Raymond Aron) ने कहा है कि “समाजशास्त्र सामाजिक क्रिया का वृहद विज्ञान है।” स्वयं वेबर भी “सामाजिक व्यवहार के संदर्भ में यह कहते हैं कि सामाजिक क्रिया का अध्ययन ही समाजशास्त्र है।"


मैक्स वेबर के अनुसार “समाजशास्त्र वह विज्ञान है, जिसका उद्देश्य सामाजिक व्यवहार के बारे में निर्वचनात्मक समझ प्राप्त करना है। यह इसलिए कि इस समझ के द्वारा सामाजिक व्यवहार के कारण और इसके प्रभावों का विश्लेषण किया जा सके।”

“समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो सामाजिक क्रिया का अर्थ पूर्ण कराने का प्रयत्न करता है, ताकि इसके घटनाक्रम या गतिविधियों एवं परिणामों की कार्य कारण व्याख्या तक पहुंचा जा सके।”


इस परिभाषा के आधार पर कह सकते हैं कि वेबर समाजशास्त्र की विषय वस्तु सामाजिक क्रिया को ही मानते थे। समाजशास्त्र वह विज्ञान है, जो सामाजिक क्रिया का अर्थ पूर्ण बोध कराने का प्रयास करता है। इसलिए हमें समाजशास्त्र की वास्तविक प्रकृति को समझने के लिए सामाजिक क्रिया की धारणा को समझना आवश्यक होगा।