आत्महत्या का सिद्धांत - Theory of Suicide
आत्महत्या का सिद्धांत - Theory of Suicide
दुर्खीम की ‘ली सुसाइड' नामक पुस्तक आत्महत्या पर एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। पुस्तक में आत्महत्या से संबंधित आंकड़ों को एकत्रित करके यह प्रमाणित करने का प्रयास किया है कि आत्महत्या निश्चित रूप से एक सामाजिक घटना है। इसे प्रमाणित करते समय उन्होंने आत्महत्या से संबंधित अधिकांश सिद्धांतों को अस्वीकार किया है। आपका कहना है कि मानसिक कारण, निर्धनता, निराशा प्रेम में असफलता और वंशानुक्रम अधिकरण आत्महत्या के मूल कारण नहीं हो सकते क्योंकि आत्महत्या मूल रूप से एक सामाजिक घटना है।
दुर्खीम के अनुसार आत्महत्या व्यक्ति पर समाज एवं समूह के अस्वस्थ दबाव का प्रतिफल है। जन समूह द्वारा व्यक्तियों पर दो प्रकार से दबाव बनाया जाता है
1. स्वस्थ दबाव (Positive Pressure)
2. अस्वस्थ दबाव (Negative Pressure)
1. स्वस्थ दबाव (Positive Pressure) प्रत्येक समाज में व्यक्ति की अनेक सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, मानसिक, नैतिक एवं जैवकीय आवश्यकताएं हैं और व्यक्ति अपने इन आवश्यकताओं को आपसी सहयोग से पूरा करते हैं। यह आवश्यकता ही व्यक्ति को एक दूसरे से जोड़ कर रखती हैं। जब व्यक्ति बिना किसी दबाव के अपने सहयोग से अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है तो समाज में संगठन रहता है और जीवन में व्यवस्था बनी रहती है। इस व्यवस्था का जो व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है उसे स्वस्थ प्रभाव या स्वस्थ दबाव कहा जाता है। यह स्वस्थ प्रभाव व्यक्ति को जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।
2. अस्वस्थ दबाव (Negative Pressure) समाज में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं जो व्यक्ति को इतना निराश कर देती कि उसका सामान्य जीवन निराशापूर्ण उपेक्षित एवं अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने आपको बिल्कुल अलग-थलग महसूस करता है। वह निराश हो जाता है। असुरक्षा की भावना महसूस करता है। उसका सामाजिक जीवन नष्ट हो जाता है और उसे ऐसा लगता है कि उसके जीवन का कोई अर्थ नहीं है। व्यक्ति पर समाज व समूह हावी होने लगता है और ऐसे में व्यक्ति यह सोचने लगता है कि जीवन से मुक्ति ही उसकी सारी परेशानियों का समाधान है।
इस तरह की निराशा पूर्ण एवं दुखी स्थिति जो सामाजिक परिस्थितियों के द्वारा उत्पन्न होती है व्यक्ति पर अस्वस्थ दबाव डालती है और यही दबाव व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए विवश करती है।
आत्महत्या की व्याख्या करते हुए दुर्खीम ने लिखा है कि प्रत्येक समाज में आत्महत्या की प्रवृत्ति होती है फर्क सिर्फ इतना ही है कि किसी में कम और किसी में अधिक होती है। हर समाज में आत्महत्या के लिए एक सामूहिक प्रवृत्ति काम करती है और यह सामूहिक प्रवृत्ति कभी-कभी व्यक्तियों को इतना अधिक नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है कि वह आत्महत्या के लिए प्रेरित हो जाता है। दुखम के अनुसार के वास्तव में आत्महत्या करने वाले व्यक्ति का नैतिक संतुलन कमजोर हो जाता है लेकिन यह कमजोरी सामूहिक नैतिक संतुलन की प्रतिछाया मात्र है। व्यक्ति हमेशा अपनी बाहरी परिस्थितियों के कारण दुखी एवं निराश होता है। यह निराशा ही उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित करती है।
दुखम एक ऐसे पहले समाजशास्त्री थे जिन्होंने अपनी रचना 'आत्महत्या' (Suicide) में सांख्यिकी पद्धति को अपनाया, आत्महत्या को एक सामाजिक तथ्य माना। उनके अनुसार इसमें बाह्यता एवं बाध्यता दोनों है। दुर्खीम का यह अध्ययन वैज्ञानिक है। उन्होंने यह अध्ययन प्रत्यक्षवादी सिद्धांत की पृष्ठभूमि में किया है। दुर्खीम के अनुसार जिस समाज में पारिवारिक एवं नातेदारी संबंध संगठित होते हैं उनमें एकीकरण होता है वहां पर आत्महत्या कम होती हैं। पर जहां संगठन एवं एकता की कमी होती है वहां पर आत्महत्या ज्यादा होती हैं।
नगरीय क्षेत्रों में परिवार में एकता एवं संगठन में कमी होने के कारण आत्महत्या की दर ज्यादा देखने को मिलती है। समाज में जितना अधिक स्थानीय या घरेलू एकीकरण होगा आत्महत्या की दर उतनी ही कम होगी। ऐसे समाज जो धर्म प्रधान हैं तथा उनमें धार्मिक एकता एवं सुदृढीकरण ज्यादा पाया जाता है। जिनमें धर्म का समाज पर प्रभाव व नियंत्रण ज्यादा होता है वहां पर आत्महत्या की दर कम होती है। इसके विपरीत धार्मिक एकता एवं नियंत्रण की कमी वाले समाज में आत्महत्या ज्यादा होती हैं। कैथोलिक धर्म में व्यक्ति पर धर्म का नियंत्रण ज्यादा होता है। इसलिए वहां पर आत्महत्याएं कम होती हैं। जबकि प्रोटेस्टेंट धर्म में व्यक्ति पर धर्म का नियंत्रण कम होता है। इसलिए इस धर्म के समर्थकों में आत्महत्या की प्रवृत्ति ज्यादा पाई जाती है। ऐसे समाज जहां पर राजनीतिक स्थिरता एवं एकीकरण होता है। वहां पर आत्महत्याएं कम होती हैं। लेकिन जहां पर राजनीतिक अस्थिरता एवं हिंसा ज्यादा होती है। वहां पर आत्महत्या की दर ज्यादा देखी गई है। जहाँ पर एकीकरण एकता एवं संगठन अधिक सुदृढ़ होगा। वहां पर आत्महत्या कम होगी। चाहे वह पारिवारिक क्षेत्र हो, धार्मिक क्षेत्र हो या राजनीतिक विपरीत परिस्थितियों में आत्महत्या की दर बढ़ जाती हैं। सामाजिक संरचना की यह संस्थाएं आत्महत्या की दर को निश्चित करती हैं। आत्महत्या तथा एकीकरण और सुदृढ़ता में विपरित संबंध है। इस संबंध को हम इस सूत्र के द्वारा समझ सकते हैं।
1) न्यूनतम आत्महत्या की दर अधिकतम एकीकरण अधिकतम सामाजिक सुदृढ़ता।
2) अधिकतम आत्महत्या की दर न्यूनतम एकीकरण न्यूनतम सामाजिक सुदृढ़ता।
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