सामाजिक तथ्यों के प्रकार - Type of Social Fact
सामाजिक तथ्यों के प्रकार - Type of Social Fact
दुर्खीम ने सामाजिक तथ्यों के दो प्रकार की चर्चा की है
1. स्वाभाविक या सामान्य (Normal)
2. अस्वाभाकि या असामान्य (Pathological)
स्वाभाविक या सामान्य तथ्य (Normal Fact)
सामान्य या स्वाभाविक तथ्य समाज के वे अंग हैं, जो सामाजिक व्यवस्था एवं संगठन को एकता एवं सहयोग प्रदान करते हैं। यह वह मानव व्यवहार है, जिसे प्रायः सभी समाजों के द्वारा स्वीकार किया जाता है।
इस प्रकार स्वाभाविक एवं सामान्य सामाजिक तथ्य से समाज को मजबूती मिलती है। यह समाज के स्वीकृत प्रतिमानों के अनुरूप होते हैं तथा सामाजिक जीवन स्वास्थ्य में वृद्धि करते हैं। यह मानव का व्यवहार है, जिसे प्रायः सभी समाजों के द्वारा स्वीकार किया जाता है। इसे हम शरीर के उदाहरण के द्वारा समझ सकते हैं। जब एक व्यक्ति का शरीर सामान्य स्थिति में होता है तो वह हर मौसम से अपने को अनुकूल कर लेता है। जिससे उसका स्वास्थ्य स्थिर रहता है, एक स्वस्थ अवस्था में व्यक्ति में रोग पनपने की संभावना न्यूनतम होती है। इसी तरह जब समाज स्वस्थ रहता है तो उसमें व्यवस्था बनी रहती है और इस व्यवस्था को बनाए रखने वाले सामाजिक तथ्य सामान्य हैं। क्योंकि इस अवस्था में व्याधिकीय तथ्यों की मात्रा न्यूनतम होती है। सामान्य सामाजिक तथ्य वे होते हैं, जो समाज में यथास्थिति को बनाए रखते हैं। जिससे की समाज में व्यवस्था बनी रहे और गड़बड़ी न हो। इस प्रकार स्वाभाविक एवं सामान्य सामाजिक तथ्य से समाज को मजबूती मिलती है।
अस्वाभाविक या और सामान्य तथ्य (Pathological Fact)
सामाजिक तथ्यों का दूसरा स्वरूप और असामान्य होता है। यह वह शक्ति है जो समाज के स्वीकृत प्रतिमानों के विरुद्ध होते हैं। यह समाज में गतिरोध पैदा करते हैं। समाज के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, जैसे अपराध, बाल अपराध, वेश्यावृत्ति, डकैती आत्महत्या आदि असामान्य सामाजिक तथ्य हैं। जब किसी भी समाज में असामान्य सामाजिक तथ्य अधिक बढ़ जाते है तो समाज का सामान्य जीवन ठप हो जाता है और समाज में अव्यवस्था उत्पन्न हो जाती है। इस समय व्यक्ति का व्यवहार समाज द्वारा स्वीकृत औसत व्यवहार के विपरीत हो जाता है।
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