सामाजिक समूह के प्रकार - type of social group

 सामाजिक समूह के प्रकार - type of social group


समाजशास्त्र में सामाजिक समूह शब्द का प्रयोग एक विशिष्ट अर्थ में किया जाता है जिसके आधार पर इसे अन्य समूहों से अलग स्पष्ट करना संभव हो पता है। गिडिंग्स ने सामाजिक समूह को अन्य समूहों से अलग करने के लिए उन्हें निम्नलिखित रूपों में विश्लेषित किया :


1. सामाजिक समुच्चय (Social Aggregates) : इसे परिभाषित करते हुए गिडिंग्स ने कहा कि यह किसी एक समय में उपस्थित ऐसे लोगों का समग्र (Collection) है जिसमे लोगों के मध्य कोई निश्चित संबंध अथवा पारस्परिक जागरूकता का अभाव हो। जैसे किसी मेले में आई हुई भीड़, रेलवे स्टेशन अथवा सिनेमा हॉल के बाहर एकत्र जन-समूह, बस तथा ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री, बाग़ में सैर करने वाले लोग आदि। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि ऐसे सामुह में किसी सामान्य जिज्ञासा बिंदु के कारण (Common Point of Attraction) लोग एक स्थान पर एकत्र होते हैं किन्तु पारस्परिक जागरूकता प्रदर्शित न करने के कारण उनमे सामाजिक संबंध विक्सित नही हो पते और यह संकलन हित पूर्ती के साथ ही विघटित हो जाता है अर्थात अस्थाई प्रकृति का होता है।


चूँकि इस प्रकार के संकलन में सामाजिक समूह की कुछ विशेशताएँ तो मिलती है। जैसे- इसमें संन्य लक्ष्य तथा व्यक्तियों का समग्र तो मिलता है किन्तु कुछ विशेशताएँ अनुपस्थित भी होती हैं। जैसे इसको निर्मित करने वाले लोगों में पारस्परिक जागरूकता अथवा निश्चित सामाजिक संबंधों पर आधारित स्थायित्व का अभाव होता है। अतः गिंसबर्ग तथा बोटोमोर ऐसे समूह को असमुह अथवा आभासी समूह (Quasi Group) कहते हैं। Quasi शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1909 में कूले ने अपनी पुस्तक Social Organisation में प्राथमिक समूह के विश्लेषण के सन्दर्भ में किया था।


ऊपर दिए गए उदाहरणों के कुछ अपवाद भी हैं। जैसे चार्टड बस में यात्रा करने वाले यात्री, अथवा ट्रेन में यात्रा करने वाले छात्रों का समूह, सामाजिक समूह के उदहारण होंगे। इसी प्रकार सिनेमा हॉल के बाहर एकत्र जन समूह अन्दर जाकर ऑडियंस में परिवर्तित हो जाता है। पार्क में टहलने वाले वृद्ध जन यदि नियमित क्रम में मिलने तथा अंतःक्रिया करने लगते है अथवा किसी औपचारिक या अनौपचारिक समूह का गठन कर लेते है तो वह सामाजिक समूह का उदहारण होगा।


2. सामाजिक श्रेणी (Social Category): यह एक सांख्यिकीय समूह होता है जिसका निर्माण अध्ययनकर्ता द्वारा अध्ययन के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया जाता है जिसमे अध्ययनकर्ता द्वारा लोगों को कुछ निश्चित विशेषताओं के आधार पर जिन्हें वे धारण करते हैं अलग-अलग समूहों में श्रेणीबद्ध किया जाता है। इस प्रकार सामाजिक श्रेणी का निर्माण अध्ययनकर्ता के व्यक्तिनिष्ठ (Subjective) दृष्टिकोण पर आधारित होता है। इसलिए एक श्रेणी को निर्मित करने वाले व्यक्ति का एक स्थान पर उपस्थित होना अथवा ऐसे किसी सम्मुहन की सदस्यता के प्रति जागरूक होना आवश्यक नही है। इसके उदहारण में समान आय, समान आयु, लिंग, शिक्षा स्तर अथवा किसी अन्य विशेषता जैसे विकलांगता अथवा किसी विशिष्ट योग्यता के आधार पर निर्मित श्रेणी इसमें सम्मिलित है। समाजशास्त्र के सन्दर्भ में सामाजिक श्रेणी को कोहोर्ट भी कहते है।


3. सामाजिक समूह (Social Group) : गिडिंग्स के अनुसार सामाजिक समूह व्यक्तियों का एक ऐसा समूह ई जिसके अंतर्गत व्यक्तियों के बीच एक-दूसरे को जानते पहचानते हो। उनका कहना है की चूँकि भीड़ में सभी लोग एक-दूसरे को नही पहचानते। इसलिए सभी के मध्य अंतर्क्रिया विकसित नहीं हो पाती। इस प्रकार उन्होंने पारस्परिक जागरूकता अथवा जान पहचान पर आधारित अंतःक्रिया को सामाजिक समूह की महत्वपूर्ण विशेषता मानी।