समुदाय के प्रकार - Types of Community
समुदाय के प्रकार - Types of Community
जैसे संपूर्ण विश्व में मानव की जनसंख्या तथा उसके क्षेत्र की अवस्थिति में भिन्नता है ठीक उसी प्रकार समुदाय के विभिन्न प्रकार हमे सामाजिक संरचना के अंतर्गत दिखाई देते है यथा; ग्रामीण समुदाय, नगरीय समुदाय, क़स्बा, क्षेत्र इत्यादि इसका विस्तार दुनिया के संपूर्ण समाजों में पाया जाता है अतः इसनकी व्याख्या अत्यंत ही आवश्यक है।
1. ग्रामीण समुदाय (Rural Community) : मानव का प्राकृतिक पर्यावरण एक समान न होकर विभिन्नता के लिए हुए होता है इसी विभिन्नता के कारण मनुष्य के सामाजिक प्रतिमान, आवास की बनावट, जनसंख्या में भी पर्याप्त विभिन्नता पायी जाती है। इसी विभिन्नता के आधार पर नगरीय समुदाय तथा ग्रामीण समुदाय में पर्याप्त विभिन्नता दिखाई देता है।
ग्रामीण समुदाय सरल जीवन तथा नीति पर चलने वाला समुदाय है जो सदस्यों के मध्य पाये जाने वाले प्राथमिक संबंधों पर आधारित होने के कारण एकीकृत संरचना को निर्मित करता है, जी अपनी प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ती हेतु स्वयं पर निर्भर होता है। इसके सदस्यों में गहरी हम की भावना होती है तथा साथ ही परम्पराओं तथा धार्मिक विश्वाशों का उनके जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान होता है।
ग्रामीण समुदाय अपनी विशेषताओं के आधार पर आदिम समुदाय से भिन्नता प्रदर्शित करते है जैसे यहाँ नियमित पशुपालन, कृषि में मानवीय शक्ति के साथ ही पशु शक्ति का प्रयोग, स्थायी निवास कृषि कार्य हेतु आधुनिक प्रौद्योगिकी का विकास, स्थानीय स्तर पर हस्तकारी तथा वाणिज्य व्यवस्था का विकास तथा हाटोंएवं बाज़ारों के माध्यम से इसका संपर्क नगरीय व्यवस्था के साथ होता है।
उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर ग्रामीण समुदाय को हम ऐसे समुदाय के रूप में परिभाषित कर सकते हैं जो अपनी स्पष्ट सामाजिक व्यवस्था को जो कि सामान्य सहमती के आधार पर संचालित होती है तथा कुछ प्राथमिक विशेषताओं जैसे कृषि की प्रधानता, प्रकृति से निकटता, प्राथमिक संबंधों की बहुलता, जनसँख्या में कमी, सामाजिक एकता, गतिशीलता का अभाव एवं ऐसी कुछ अन्य विशेशताएं भी यहाँ की सामाजिक संरचना के संचालन में सहायक होती हैं के माध्यम से संचालित होती हैं।
वार्तालाप में शामिल हों