शक्ति के प्रकार - Types of Power

 शक्ति के प्रकार - Types of Power


गोल्ड हैमर और शील्स ने शक्ति के तीन प्रकार बताए हैं


1. बल- जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को शारीरिक एवं भौतिक शक्ति के द्वारा प्रभावित करता है या उस पर दबाव डालने का प्रयास करता है तो इस शक्ति को बल कहते हैं।


2. प्रभुत्व- प्रभुत्व का आधार आदेश या आग्रह भी हो सकता है। जब एक शक्तिशाली व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को आदेश या अनुरोध के माध्यम से अपनी इच्छा अनुसार काम करने को बाध्य करता है तो उसे प्रभुत्व कहते हैं। प्रभुत्व में साधारणता अनिवार्यता तथा शक्ति और सत्ता का तत्व निहित होता है। इसमें शक्तिमान व्यक्ति अपनी इच्छा को प्रकट कर दूसरे के व्यवहार को प्रभावित करता है।


3. चातुर्य- जब कोई व्यक्ति बिना अपनी इच्छा व्यक्त किए हुए दूसरे के व्यवहार को प्रभावित करता है तो हम उसे चातुर्य कहते हैं। इसके माध्यम से शक्तिशाली व्यक्ति अप्रत्यक्ष रूप से सामने वाले पक्ष को अपनी इच्छा अनुसार चलने के लिए तैयार करवाता है।

इसे तोड़ने-मरोड़ने की शक्ति भी कहते हैं। इस प्रकार तोड़ने-मरोड़ने का कार्य प्रतीकों की सहायता से किया जाता है।


और प्रचार इसका प्रमुख उदाहरण है। गोल्ड हैमर तथा शिल्स का कथन है कि कानूनी तौर पर शक्ति के दो प्रमुख प्रकार हो सकते हैं।


1. विधिवत शक्ति विधिवत शक्ति वह है जिसे कि समाज या कानून से मान्यता प्राप्त होती है। सामाजिक एवं कानूनी दृष्टि से वह शक्ति निषिद्ध नहीं है।


विधिवत शक्ति के तीन प्रकार हैं।


अ. कानूनी शक्ति इसका प्रमुख स्रोत समाज की विधि व्यवस्था और संविधान होता है।


ब. परंपरागत शक्ति- इसका प्रमुख समाज के रीति रिवाज प्रथा और परंपराएं होती हैं।


स. करिश्माई शक्ति इसका प्रमुख स्रोत व्यक्ति विशेष की क्षमता और अलौकिक सामर्थ्य होता है।


2. गैरकानूनी शक्ति- यह वह शक्ति है, जिससे समाज और कानून मान्यता नहीं देता। उदाहरण के तौर पर डाकू की अपनी शक्ति होती है पर उस व्यक्ति को समाज एवं कानून स्वीकार नहीं करता पर समाज उससे डरता है।


मैक्स वेबर ने शक्ति के चार प्रकारों का उल्लेख किया है


a. दमन (Coercion) - जब कोई शक्तिशाली व्यक्ति अनौचित्यपूर्ण ढंग से शक्ति का प्रयोग करता है। उसका प्रभाव सामने वाले व्यक्ति पर नकारात्मक रूप से पड़ता है तो यह शक्ति का दमन रूप होता है।


b. वैधानिक शक्ति (Legal power) जब कोई शक्तिशाली व्यक्ति अपनी शक्ति का प्रयोग कानूनी तरीके से करता है तो उसे वैधानिक शक्ति कहते हैं।

c. परंपरागत शक्ति (Traditional power) जब किसी शक्तिशाली व्यक्ति को शक्ति की प्राप्ति परंपरागत आधार पर होती है और उसके आदेशों का पालन लोग परंपरा के करते हैं तो उस शक्ति को परंपरागत शक्ति कहते हैं। अनुसार


d. करिश्मावादी शक्ति (Charismatic power) - जब समाज के लोग किसी शक्तिशाली व्यक्ति के आदेशों व इच्छाओं का पालन उसकी विशेषताओं, उसमें अटूट विश्वास या उसके प्रति होने वाली श्रद्धा के कारण करते हैं तो उस व्यक्ति की शक्ति को करिश्मावादी शक्ति कहते हैं।


सामाजिक संगठन में शक्ति का संबंध दूसरे व्यक्तियों से होता है यह शक्ति संबंध दो तरह का होता है एक पक्षीय शक्ति- संबंध जब किसी शक्ति संबंध में केवल एक ही पक्ष दूसरे को प्रभावित करता है तो उसे एक पक्षीय शक्ति संबंध कहते हैं जैसे नौकर और मालिक के बीच का संबंध। द्विपक्षीय शक्ति संबंध जब किसी शक्ति संबंध में दोनों पक्ष एक दूसरे को प्रभावित करते हैं तो उसे द्विपक्षीय शक्ति संबंध कहा जाता है जैसे उत्पादक और खरीदार के बीच में संबंध। शक्ति के प्रयोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हो सकता है पर इतना अवश्य है कि शक्ति संबंध में जिस पक्ष का प्रभाव जितना अधिक होता है उसकी स्थिति उसी अनुपात में ऊंची होती है।