मैक्स वेबर का पद्धतिशास्त्र - Weber's Methodology
मैक्स वेबर का पद्धतिशास्त्र - Weber's Methodology
समाजशास्त्रीय अध्ययन एवं सिद्धांतों के निर्माण में वेबर की पद्धति शास्त्र एक महत्वपूर्ण देन है। इसमें वेबर ने प्राकृतिक घटनाओं एवं सामाजिक क्रियाओं के अंतर को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। वेबर के अनुसार प्राकृतिक घटनाएं न तो अर्थपूर्ण होती है और ना ही उद्देश्यपूर्ण जबकि सामाजिक क्रियायें
उद्देश्यपूर्ण होती हैं। प्राकृतिक विज्ञान के नियम सार्वभौमिक होते हैं। यह सभी स्थान एवं समय में एक समान होते हैं जबकि समाजशास्त्री नियमों में यह विशेषताएं नहीं पाई जाती। मैक्स वेबर की पद्धतिशास्त्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. मैक्स वेबर के समाजशास्त्र को निर्वचनात्मक ज्ञानवर्धन समाजशास्त्र कहा जाता है क्योंकि वैबर समाजशास्त्र में सामाजिक क्रियाओं के अर्थ पूर्ण अवरोधन पर बल देते हैं।
2. वेबर ने प्राकृतिक विज्ञानों की भांति ही सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए कार्यकारण संबंधों पर जोर दिया।
3. सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए तुलनात्मक अध्ययन पद्धति को अपनाया जाना चाहिए। इसके द्वारा हम दो समाजों या दो घटनाओं की समानता और असमानता को ज्ञात कर सकते हैं।
4. सामाजिक घटनाओं को समझने के लिए आदर्श प्रारूप का निर्माण आवश्यक है। हमें आदर्श प्रारूप का निर्माण वास्तविक जीवन में से कुछ महत्वपूर्ण और विशिष्ट तयों और विशेषताओं को चुनकर करना चाहिए।
5. कुछ घटनाओं का चयन करके ही उसका अध्ययन किया जाना चाहिए क्योंकि वेबर के अनुसार समाजशास्त्र में सब कुछ का अध्ययन उचित नहीं है। सब कुछ का अध्ययन कुछ नहीं का अध्ययन है।
6. सामाजिक घटनाओं के अध्ययन में वस्तुनिष्ठ अध्ययन पर जोर देना चाहिए और मूल्याकनात्मक निर्णय से दूर रहना चाहिए क्योंकि मूल्याकनात्मक अध्ययन हमेशा वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हो सकते।
7. समाजशास्त्र में क्या है का अध्ययन होना चाहिए ना कि क्या होना चाहिए का।
वार्तालाप में शामिल हों