टोटम क्या है - What is Totem
टोटम क्या है - What is Totem
दुर्खीम के अनुसार टोटम एक नाम है, एक प्रतीक है, एक चिन्ह है, टोटम एक गोत्र समूह का नाम है। टोटम किसी गोत्र समूह से संबंधित वस्तु हैं। दुर्खीम ने ऑस्ट्रेलिया की अरुंटा जनजाति का अध्ययन किया। ऑस्ट्रेलिया की प्रत्येक जनजातियों में प्रत्येक गोत्र का एक टोटम होता है। यह उनके सामूहिक जीवन में केंद्रीय स्थान रखता है। टोटम के आधार पर ही गोत्र का नामकरण होता है। किसी जनजाति के दो गोत्रों का एक टोटम नहीं हो सकता। दुर्खीम ने अपने अध्ययन के आधार पर गोत्र समूहों की दो विशेषताओं का उल्लेख किया है
1. गोत्र के सदस्य परस्पर नातेदारी के संबंधों के आधार पर संगठित होते हैं।
2. गोत्र का नाम किसी भौतिक वस्तु के नाम पर होता है, जिसे टोटम कहा जाता है।
दुर्खीम के अनुसार एक टोटम को मानने वालों में परस्पर नातेदारी एवं रक्त के संबंध होते हैं। वह अपनी उत्पत्ति टोटम से मानते हैं। इसलिए ये भाई बहन समझे जाते हैं और वे परस्पर विवाह नहीं करते। प्रत्येक गोत्र अपने टोटम के साथ घनिष्ठता रखता है। हर टोटम का कोई न कोई प्रतीक व चिन्ह होता है। यह कोई भी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, वनस्पति या वस्तु हो सकती है। कभी-कभी कुछ विशिष्ट अद्भुत वस्तुएं भी टोटम का काम करती हैं। जैसे सूर्य, चंद्रमा, तारे आदि। कभी-कभी कोई पूर्वज या पूर्वज समूह भी टोटम का कार्य करता है। दुर्खीम के अनुसार “प्रत्येक गोत्र अपनी उत्पत्ति टोटम से मानता है एवं टोटम के प्रति श्रद्धा का भाव रखता है। उसके प्रति निषेधों का पालन करता है। फिसन और होविट में टोटम को गोत्र का बिल्ला कहा जाता है। यह एक प्रकार का चिन्ह या पदक है।
इसे समूह के सदस्य दीवारों पर लगाते हैं। कई बार युद्ध में जाने से पहले अपनी ढाल, कवच और शस्त्रों पर भी टोटम का चित्र अंकित करते हैं।
मृत व्यक्तियों की समाधि के पास ही वृक्षों पर भी टोटम का चिन्ह लगा दिया जाता हैं। टोटम का चिन्ह केवल बाहरी वस्तु पर ही अंकित नहीं किया जाता बल्कि इसका प्रदर्शन कई बार सदस्य अपने शरीर पर भी करते हैं। मकानों की दीवारों, मकबरों, बर्तनों आदि स्थानों पर भी टोटम का चिन्ह अंकित करते हैं और इस तरह ये चिन्ह उनके शरीर का अंग बन जाता है। किसी उत्सव, पर्व एवं संस्कार के अवसर पर लोग टोटम को सारे शरीर पर अंकित करवाते हैं। यदि टोटम पशु है तो उसकी खाल पहनी जाती है और यदि पक्षी है तो उसके पंख सिर पर लगाए जाते हैं। दुर्खीम ने टोटम को प्रारंभिक ज्ञान का केंद्रीय तत्व माना है, टोटम की प्रकृति धार्मिक होती है। टोटम के आधार पर वस्तुओं को पवित्र और साधारण माना जाता हैं। टोटम स्वयं पवित्रता का केंद्र है स्वयं पवित्र है। दुर्खीम के अनुसार टोटमवाद वह विश्वास एवं धारणा है जो किसी गोत्र के सदस्य अपने टोटम के प्रति रखते हैं।
इस प्रकार दुर्खीम टोटमवाद को स्पष्ट करते हुए लिखते हैं, “टोटमवाद नैतिक कर्तव्य और मौलिक विश्वासों का वह समूह है जिसके द्वारा समाज पशु, पौधों तथा अन्य प्राकृतिक वस्तुओं के बीच एक पवित्र और अलौकिक संबंध स्थापित हो जाता है।" आदिवासी यह मानते हैं कि टोटम में अलौकिक शक्ति का निवास है जो उनके सामाजिक जीवन को नियंत्रित करती हैं। टोटम से संबंधित विभिन्न अवधारणाओं, विश्वास एवं संगठन को ही टोटमवाद कहा जाता हैं।
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