मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 - Dissolution of Muslim Marriage Act, 1939

मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 - Dissolution of Muslim Marriage Act, 1939


मुस्लिम समाज में पुरुषों को विवाह-विच्छेद संबंधी अनेक अधिकार प्राप्त हैं और वे इच्छानुसार, कभी भी अपनी पत्नी को तलाक दे सकते हैं. परंतु स्त्रियाँ अपने पति की इच्छा के विरुद्ध कभी भी तलाक नहीं दे सकती और वे अनेक निर्योग्यताओं से पीड़ित रहती हैं। इन निर्योग्यताओं को दूर करने के उद्देश्य से सन् 1937 में मुस्लिम शरीयत अधिनियम (Muslim Shariat Act ) पारित किया गया। इसके अन्तर्गत मुस्लिम स्त्रियों को इला और जिहर के आधार पर विवाह-विच्छेद करने का अधिकार दिया गया है। इसके पारित होने के उपरान्त भी स्त्रियों को पुरुषों के समान विवाह-विच्छेद संबंधी अधिकार प्राप्त नहीं हुआ और अन्त में सन् 1939 में मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम (Dissolution of Muslim Marriage Act, 1939) पारित हुआ। यह अधिनियम मुस्लिम शरीयत अधिनियम, 1937 में संशोधन करने के उद्देश्य से पारित किया गया था। मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 के अनुसार स्त्रियों को विवाह-विच्छेद संबंधी पूर्ण अधिकार प्रदान किए गए हैं। इस अधिनियम में 6 धाराएँ हैं, जिनमें धारा 2 अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

इसके अनुसार एक स्त्री जिसका विवाह मुस्लिम कानून के अनुसार हुआ है, निम्नलिखित आधारों पर विवाह-विच्छेद के लिए प्रार्थना पत्र देकर राजाज्ञा प्राप्त कर सकती है -


1. यदि पति के बारे में चार वर्ष तक कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई हो।


2. यदि पति लगातार दो वर्ष तक अपनी पत्नी के भरण-पोषण की व्यवस्था करने में असफलत रहा हो।


3. यदि पति को सात या अधिक वर्षों के लिए जेल की सजा हो चुकी हो। इस आधार पर तलाक उस समय दिया जा सकता है. जब सात वर्ष की सजा का आखिरी फैसला हो चुका हो।


4. यदि पति तीन वर्ष से बिना किसी पर्याप्त कारण के अपने वैवाहिक कर्तव्यों को पूर्ण नहीं कर रहा हो। 


5. यदि यह सिद्ध हो जाए कि पति विवाह के समय नपुंसक था और यही अवस्था ततलाक के समय भी जारी है। लेकिन पति अदालत में प्रार्थना पत्र दे सकता है कि उसे एक वर्ष का समय और दिया जाए और यदि वह इस अवधि के पश्चात् अपने ठीक होने का प्रमाण प्रस्तुत कर दे तो तलाक की आज्ञा नहीं मिलती है। 


6. यदि पति दो वर्ष से पागल हो. कुष्ठ अथवा संक्रामक यौन रोग से पीड़ित हो।


7. यदि उसका विवाह 15 वर्ष से कम आयु में उसके पिता या अन्य संरक्षण द्वारा कर दिया गया हो और इस अवधि में पति-पत्नी का यौन संबंध न हुआ हो तथा लड़की ने 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पहले ही ऐसे विवाह के विरुद्ध प्रतिवेदन कर दिया हो।


8. यदि पति पत्नी के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार करें. जैसे -


(अ) उसे प्रायः पीटता हो या अन्य प्रकार से क्रूरता का व्यवहार करता हो।


(ब) चरित्रहीन स्त्रियों के साथ सम्पर्क रखता हो।


(स) पत्नी को व्यभिचारपूर्ण जीवन व्यतीत करने को बाध्य करता हो ।


(द) उसकी संपत्ति को बेचता हो या उसके सांपत्तिक अधिकारों के प्रयोग में बाधा डालता हो।


(य) पत्नी के धार्मिक कार्यों में बाधा डालता हो.


(र) एक से अधिक पत्नियाँ रखकर कुरान के अनुसार सबके साथ समान व्यवहार न करता हो। 9. किसी अन्य आधार पर जो मुस्लिम कानून के अनुसार विवाह-विच्छेद के लिए मान्य हो। के