1940 से 1970 के बीच का समाज मनोविज्ञान - Social Psychology from the 1940s to the 1970s
1940 से 1970 के बीच का समाज मनोविज्ञान - Social Psychology from the 1940s to the 1970s
तत्कालिन परिस्थितियों में द्वितीय विश्वयुद्ध का बहुत ही व्यापक प्रभाव पड़ा. कोई भी विषय इस प्रभाव से अछूते नहीं थे वैसे ही समाज मनोविज्ञान में भी इसका काफी प्रभाव पड़ा। प्रभाव का ही परिणाम था की मनोवैज्ञानिकों के अध्ययन के मुख्य विषय प्रचार (propaganda), पूर्वाग्रह (prejudice), अनुनय (persuation), मनोवृत्ति मापन अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध (international relation) तथा जनसम्पर्क (mass communication) का वैज्ञानिक अध्ययन करना प्रारंभ कर दिए। 1941 में विलियम वाइट (William White, 1941) ने बच्चों के समूह का अध्ययन करके उनकी सामाजिक अंतःक्रिया के पैटर्न के बारे में बतलाया। कार्ल होवलैंड एवं उनके सहयोगियों (Carl Hovland et.al.) ने इसी काल में अनेकों ऐसे अध्ययन किये जिनमे सामाजिक मनोवृत्ति पर विश्वासोत्पादक या प्रभाक संचारण (persuasive communication) के पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया। इसी दशक में सबसे महत्त्वपूर्ण अध्ययन फेस्तिंगेर (Leon Festinger) ने 1957 में किया। अपने अध्ययन के आधार पर इन्होंने संज्ञानात्मक विसंवादिता का सिद्धांत (theory of cognitive dissonance) जिसके अनुसार जब व्यक्ति का व्यवहार तथा उसकी वर्तमान मनोवृत्ति एक दुसरे के असंगत होते हैं तो व्यक्ति में एकक प्रकार की अप्रिय एवं तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है. इसे कम करने के वह अपनी मनोवृत्ति में परिवर्तन कर व्यवहार को अनुकूल बना लेता है।
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