शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 - Right to Education Act, 2009

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 - Right to Education Act, 2009


अगस्त 2009 में संसद द्वारा बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का ऐतिहासिक अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम को बच्चों के परिपेक्ष्य में सार्थक क्रियान्वायन के रूप में देखने की आवश्यकता है। यह एक वैधानिक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए समानता और भेदभाव रहित शिक्षा के लिए निर्देशित होता है। यह बच्चे कोनिःशुल्क एवं अनिवार्य नामांकन और प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने का अधिकार प्रदान करता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह बच्चों को चिंता से मुक्त, बिना किसी डर यातनाव के शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिनियम में कई प्रकार के प्रावधान हैं जैसे किसी भी प्रकार के शारीरिक दंड, कक्षा में फेल न करना। यह सुनिश्चित करना है

कितना व और चिन्ता से मुक्त व शिक्षण अधिगम प्रक्रिया का क्रियान्वयन हो। इसमें मूल्यांकन प्रभावी एवं कक्षा अधिगम गतिविधि को पुनर्निरीक्षण करने की आवश्यकता है जिससे बच्चों में सीखने के प्रति गहरी रूचि जागृत हो सके। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के द्वारा सभी बच्चों का विद्यालयों में पूर्णकालिक नामांकन आवश्यक है। उनके नामांकन को बढ़ाने, विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति को घटाने. उन्हें अन्य वर्गों के बच्चों के समकक्ष लाने के लिए अनेक योजनाएँ कार्यक्रम व नीतियाँ बनाई गई। शिक्षकों की भूमिका इस संदर्भ में अतिमहत्वपूर्ण हो जाती है।


शिक्षा का अधिकार अधिनियम शिक्षकों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है। शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि वह सुनिश्चित करे कि बच्चे सीख रहे हैं तथा उनके सीखने का वातावरण तनाव और चिन्ता से मुक्त हो और उनके इस अधिकार का हनन न हो।